वैदिक पंचांग के अनुसार संकष्टी चतुर्थी पर शिव योग पूरे दिन बन रहा है
लखनऊ। हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश जी को समर्पित होता है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली यह चतुर्थी विशेष रूप से एकदंत गणपति की पूजा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भक्त दिनभर व्रत रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद भगवान गणेश की विधिवत पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं इस साल एकदंत संकष्टी चतुर्थी 5 मई को पड़ रही है। साथ ही इस दिन 2 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। वैदिक पंचांग के अनुसार संकष्टी चतुर्थी पर शिव योग पूरे दिन बन रहा है। साथ ही अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 11:51 ए एम से 12:45 पी एम तक रहेगा। इस बीच में गणेश जी की पूजा- अर्चना कर सकते हैं।
2 शुभ योग में एकदंत संकष्टी चतुर्थी
पंचांग के मुताबिक 5 मई को एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन 2 शुभ योग बन रहे हैं। आपको बता दें कि शिव योग प्रात:कल से लेकर 6 मई को 12:17 ए एम तक रहेगा। वहीं उसके बाद से सिद्ध योग बनेगा।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के एकदंत स्वरूप की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे भक्तों के जीवन से सभी बाधाओं और कष्टों को दूर करते हैं। वहीं इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियां, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव कम होने का मान्यता है।
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान कर साफ कपड़े पहनें। पूजन स्थल को साफ करें। उस स्थान को गंगाजल डालकर पवित्र करें। फिर वहां एक चौकी लगाएं। चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। उस पर स्वास्तिक बनाकर चावल और फूल से उसकी पूजा करें। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर विराजित करें। दीपक और धूप जलाएं। भगवान गणेश के मस्तक पर कुमकुम का तिलक लगाएं। साथ में भगवान गणेश के चरणों में दूर्वा घास अर्पित करें। भगवान गणेश को यह बहुत प्रिय है। इसलिए चतुर्थी व्रत में दूर्वा अवश्य अर्पित की जाती है। भगवान गणेश का ध्यान करते हुए उन्हें प्रणाम करें। फिर गणेश स्तुति, गणेश चालीसा और गणेश अष्टकम का पाठ करें। इसके बाद भगवान गणेश की आरती करें। गणेश जी के जयकारे लगाते हुए उन्हें भोग लगाएं। संभव हो तो लड्डू या मोदक का भोग लगाएं।





