आधिकारिक वेबसाइट —का शुभारंभ किया गया
लखनऊ। आज के समय में जब सार्थक संवाद कम होते जा रहे हैं, पढ़ने वालों का समुदाय एक सुरक्षित और गैर-आलोचनात्मक मंच के रूप में उभर रहा है, जहाँ लोग खुलकर अपने विचार साझा कर सकते हैं, सीख सकते हैं और अपने आप को विकसित कर सकते हैं। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए बुक अ ट्रीट ने लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित एक प्रतिष्ठित होटल में अपनी तीसरी वर्षगांठ एक गरिमामय और विचारोत्तेजक कार्यक्रम के रूप में मनाई। शिल्पा गुप्ता द्वारा स्थापित बुक अ ट्रीट की शुरूआत पढ़ने की आदत को बनाए रखने के एक सरल प्रयास के रूप में हुई थी, जो आज एक सशक्त मंच बन चुका है—जहाँ संवाद, आत्म-विकास और सामूहिक सीख को बढ़ावा दिया जाता है।
इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में आधिकारिक वेबसाइट —का शुभारंभ किया गया, जिसके माध्यम से सदस्य अपने विचारों और अनुभवों को वैश्विक स्तर पर साझा कर सकेंगे। यह मंच लोगों को यह भी दिखाता है कि बुक अ ट्रीट की चचार्एँ और मासिक बैठकों में किस स्तर का विचार-विमर्श और गहराई होती है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था पुस्तक स्ट्रैप्स कोएलिशन एंड पावर गेम्स के विषय पर विस्तार से संवाद हुआ, जिसे पुस्तक की लेखिका सुनीता एरन ने प्रस्तुत किया। एरन ने जाति, वर्ग और सांप्रदायिक राजनीति की विभिन्न परतों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के सार को उजागर किया है। कांशी राम, कल्याण सिंह, मुलायम सिंह यादव,मायावती, अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ जैसे कुछ नेताओं के बारे में विस्तार से चर्चा की। इस चर्चा का संचालन बीना कृष्णा ने अत्यंत रोचक, बुद्धिमत्तापूर्ण और प्रभावशाली शैली में किया, जिसने पूरे सत्र को जीवंत बना दिया।
डॉ उर्वशी साहनी ने कार्यक्रम को और समृद्ध किया।जिनके तीन दशकों से अधिक के सामाजिक और शैक्षिक कार्यों ने दर्शकों को गहराई से प्रेरित किया।
इस पूरे आयोजन का संचालन मास्टर आॅफ सेरेमनी गरिमा त्रिपाठी एवं मितुषी नेगी द्वारा अत्यंत सहजता और प्रभावशीलता के साथ किया गया, जिसने कार्यक्रम को सुचारु और आकर्षक बनाए रखा। बुक अ ट्रीट की मूल भावना के अनुरूप यह आयोजन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि विचारों, अनुभवों और जुड़ाव का एक जीवंत मंच बना, जहाँ सदस्य-प्रस्तुतियों के माध्यम से इसकी मासिक बैठकों की झलक भी देखने को मिली। इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए शिल्पा गुप्ता ने कहा, बुक अ ट्रीट सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है—यह सोचने, व्यक्त करने और साथ मिलकर आगे बढ़ने की एक यात्रा है। तीन वर्षों की इस यात्रा के साथ बुक अ ट्रीट ने यह सिद्ध किया है कि संवाद, सीख और मानवीय जुड़ाव की शक्ति से सशक्त समुदायों का निर्माण संभव है।





