पुरोहित बोर्ड के गठन की मांग
-यह यात्रा ‘साधु बाबा स्थान’ से सुंदरकांड के पाठ के साथ आरंभ हुई
-पांच दिनों तक जारी रहेगी यात्रा, विभिन्न मठ-मंदिरों के साधु-संत रहेंगे शामिल, मिलेंगे मुख्यमंत्री से
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में साधु-संतों की समस्याओं को सरकार तक पहुँचाने और अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में एक पाँच दिवसीय पदयात्रा निकाली गई। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य साधु-संतों के कल्याण और मंदिरों की सुरक्षा के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग करना है।
पदयात्रा में शामिल साधु-संतों का आरोप है कि विभिन्न मंदिरों से जुड़े साधु-संतों की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि मंदिरों पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जे किए जा रहे हैं और आर्थिक रूप से कमजोर साधु-संतों को प्रताड़ित किया जा रहा है। संतों का यह भी कहना है कि बीमार होने पर उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती और न ही उनकी सुध लेने वाला कोई है।
पदयात्रा संयोजक जनसेवक राजा दास ने बताया कि यह यात्रा ‘साधु बाबा स्थान’ (जेहटा माल रोड, लखनऊ) से सुंदरकांड के पाठ के साथ आरंभ हुई। पूजन अनुष्ठान के दौरान विभिन्न मठ-मंदिरों के साधु-संत, पत्रकार, कलाकार शामिल हुए। पूजन के बाद यह यात्रा शीतलबाग ‘प्यारे बाबा स्थान’ तक पहुँची। इस यात्रा में राजा दास, एडवोकेट पुजारी मनोज पांडे, रामकिशन दास, मंगल बाबा, सर्वेश गिरी, कमलेश बाबा सहित कई साधु-संत शामिल हुए। यात्रा के दौरान नटखेड़ा, आलमबाग में महामंडलेश्वर सोमवार गिरी जी महाराज का आशीर्वाद भी लिया गया। ‘जनसेवक’ राजा दास का कहना है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती। साधु-संतों की प्रमुख मांगों में साधु-संतों के लिए जल्द से जल्द ‘पुरोहित बोर्ड’ का गठन किया जाने। साधु-संतों के लिए निशुल्क चिकित्सा की उचित व्यवस्था, मंदिरों से जुड़ी संपत्ति पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को रोका जाए। जनसेवक राजादास ने कहा कि मंदिरों की खाली पड़ी भूमि का उपयोग स्कूल, कॉलेज या अस्पताल बनाने के लिए किया जाए, ताकि उसका लाभ समाज को मिल सके। साधु-संतों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।





