लखनऊ। इस बार ज्येष्ठ मास में चार नहीं आठ मंगल पड़ेंगे और जगह-जगह भंडारे का आयोजन होगा। पांच मई को पहला पहला मंगल शुरू होगा। पं. बिन्द्रेस दुबे ने बताया कि इस साल ज्येष्ठ का महीना दो मई से लेकर 29 जून तक रहेगा। अधिक मास के कारण ज्येष्ठ माह पूरे 59 दिन का होगा। 19 साल बाद यह संयोग बन रहा है। इससे पहले 2007 में ज्येष्ठ मास में आठ मंगल पड़े थे। बिन्द्रेस दुबे ने बताया कि अधिक मास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का एक विशेष महीना होता है। यह तब जोड़ा जाता है जब चंद्र वर्ष (लगभग 354 दिन) और सौर वर्ष (लगभग 365 दिन) के बीच का अंतर बढ़ जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर ढाई से तीन तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से अधिक मास को बहुत पवित्र माना जाता है। इस महीने में विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। इस बार ज्येष्ठ मास में दो महीने का होगा। उधर, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने कहा कि इस वर्ष बड़े मंगल को और भी विशेष बनाने के लिए भंडारों को स्वच्छ, हरित और प्लास्टिक मुक्त बनाना आवश्यक है।
पालीथिन, प्लास्टिक ग्लास, चम्मच और प्लेटों का उपयोग पूरी तरह बंद किया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ धार्मिक परंपरा का मान भी बढ़े। मंगलमान अभियान के संयोजक प्रो. रामकुमार तिवारी ने शहरवासियों से अपील की कि वे स्वच्छता और श्रद्धा के साथ भंडारे आयोजित करें। दो मई को सम्मान के साथ अभियान की शुरूआत होगी।
लखनऊ में 500 साल पुरानी परंपरा आज भी जीवंत
जहां हर बड़ा मंगल पर उमड़ती है भीड़
लखनऊ के अलीगंज में स्थित पुराना हनुमान मंदिर शहर के सबसे प्रसिद्ध और पुराने हनुमान जी के मंदिरों में से एक गिना जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहर भी है। इसके ऊपर चांद और तारे का निशान है, इसलिए इसे चांद तारा मंदिर भी कहा जाता है। अलीगंज में दो मुख्य हनुमान मंदिर हैं-पुराना हनुमान मंदिर और नया हनुमान मंदिर. दोनों मंदिरों का धार्मिक महत्व है। हालांकि, पुराना हनुमान मंदिर अधिक शांत वातावरण वाला है और यहां भक्तों को शांति का अनुभव होता है। यह कपूरथला चौराहे से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है। इस मंदिर में विशेष महत्व रखता है। बड़ा मंगल के दिन यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में भव्य पूजा-अर्चना, सुंदरकांड पाठ और बड़े स्तर पर भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है. मंदिर की वास्तुकला बहुत आकर्षक है. इसमें तीन प्रवेश द्वार हैं। मुख्य द्वार पर ऋषि-मुनियों, भगवान गणेश और भारत माता की सुंदर मूर्तियां बनी हुई हैं। मंदिर के अंदर भगवान हनुमान जी की भगवा रंग की सुंदर मूर्ति स्थापित है। मंदिर का गुंबद इस्लामी वास्तुकला से मिलता-जुलता है जो इसे अनोखा बनाता है। इस मंदिर का निर्माण लगभग 500 साल पहले हुआ माना जाता है, कहा जाता है कि नवाब मोहम्मद अली शाह की पत्नी बेगम रबीया को स्वप्न में हनुमान जी की मूर्ति दिखी, उन्होंने मूर्ति को खोज कर मंदिर में स्थापित करवाया. बाद में नवाब ने इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। कथा के अनुसार, जब बेगम रबीया ने भगवान हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना करवाई, तो उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. इसके बाद नवाब ने मंदिर के ऊपर चांद और तारा का चिन्ह लगवाया। आगे चलकर 1966 में लखनऊ के बनारसी दास कपूर चंद अग्रवाल जी ने मंदिर का पुनर्निर्माण और सुधार करवाया. बड़ा मंगल लखनऊ की खास परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति मिलती है। पुराना हनुमान मंदिर इस परंपरा का केंद्र है। यहां हर बड़ा मंगल को भक्तों के लिए विशाल भंडारे आयोजित होते हैं, जिसमें श्रद्धालु सेवा भावना से भाग लेते हैं।





