मेरी फाउंडेशन इतनी मजबूत कर दी कि मैं लंबे समय तक शूटिंग कर सकूं
लखनऊ। जल्द ही करण अंशुमन द्वारा निर्देशित नई वेब सीरीज ग्लोरी नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रही है। इस सीरीज में बॉक्सिंग की दुनिया और पारिवारिक रिश्तों की जटिलताओं को खूबसूरती से पेश किया गया है। इसमें पुलकित सम्राट दिव्येंदु शर्मा, जन्नत जुबैर और आशुतोष राणा जैसे दमदार कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। हाल ही में पुलकित और दिव्येंदु ने इस सीरीज को लेकर खुलकर बातचीत की।
इस प्रोजेक्ट के लिए आपकी तैयारी की शुरूआत कब हुई?
पुलकित- जब मैंने निर्देशक करण अंशुमन से मुलाकात की तो मैंने साफ कहा कि मुझे अच्छा काम करना है और काम मांगने में मुझे कोई शर्म नहीं है, उन्होंने मुझे कहानी सुनाई और बताया कि प्रोजेक्ट अभी डेवलपमेंट स्टेज में है यहां तक कि प्लेटफॉर्म भी फाइनल नहीं हुआ था, लेकिन मैंने उसी समय तय कर लिया कि मैं इसका हिस्सा बनना चाहता हूं। घर जाकर मैंने तुरंत अपनी तैयारी शुरू कर दी। तीन महीने की कड़ी ट्रेनिंग ने मेरी फाउंडेशन इतनी मजबूत कर दी कि मैं लंबे समय तक शूटिंग कर सकूं।
इस सीरीज में आपका रोल और आपकी आॅन-स्क्रीन केमिस्ट्री मिलकर कहानी को किस तरह आगे बढ़ाते हैं?
दिव्येंदु- मेरे किरदार में त्याग, बलिदान और रिश्तों का गहरापन है। हमारे रोल इतने अच्छे से लिखे गए थे कि हमें बहुत ज्यादा बात करने की जरूरत नहीं पड़ी. लेकिन केमिस्ट्री बेहद जरूरी थी। अगर इसे ओवरप्ले कर देते, तो स्क्रीन पर मजा नहीं आता। हमारे किरदारों के बीच भाईचारा और बैगेज दोनों हैं। आॅफ-स्क्रीन बॉन्डिंग ने आॅनस्क्रीन रिश्तों को और भी मजबूत किया. जब आप और आपका साथी सहज रहते हैं, तो सीन अपने आप अच्छे बनते हैं।
अपने किरदार को रियलिस्टिक बनाने के लिए आपने किस तरह की फिजिकल तैयारी की?
पुलकित – मैं पिछले 9-10 सालों से फिटनेस में हूं, लेकिन इसके बाद भी मेरे लिए बॉक्सर की तरह दिखना अलग चुनौती थी। मैंने अपने ट्रेनिंग रूटीन को पूरी तरह बदल दिया एरोबिक, एंड्योरेंस, लंबी शूटिंग में एनर्जी बनाए रखना। मेरा मकसद सिर्फ मसल्स दिखाना नहीं, बल्कि पूरे दिन शूटिंग करने में सक्षम होना था। इसके लिए मैंने इंजरी प्रिवेंशन और आयुर्वेदिक डॉक्टर्स की मदद भी ली।
इस रोल के लिए आपने अपने माइंडसेट और इमोशंस पर किस तरह काम किया?
दिव्येंदु- किरदार में ढलने के लिए मेरी सालों की एक्टिंग काम आई. हर रोल अलग प्रोसेस मांगता है। मैंने किरदार को समझा, उसके मूवमेंट, बॉडी लैंग्वेज और मानसिकता पर काम किया। सेट पर हर दिन एक्टिंग के साथ-साथ मानसिक फोकस भी बनाए रखना जरूरी था।
करण अंशुमन ने आप दोनों से पहली ब्रीफ में क्या कहा? जैसा कि कई निर्देशक कहते है कि को-एक्टर से बात नहीं करनी, उन्होंने भी ऐसा कुछ कहा था क्या?
दिव्येंदु- असल में जो कैरेक्टर्स लिखे गए हैं, उनमें इतना कुछ था ही नहीं कि अलग से कुछ बात करनी पड़े। हम प्रोफेशनल एक्टर्स हैं, हमें पता होता है क्या करना है, लेकिन ऐसे किरदार निभाने के लिए बहुत जरूरी है कि एक्टर्स के बीच मजबूत केमिस्ट्री हो। अगर आप ज्यादा प्ले करोगे तो स्क्रीन पर मजा नहीं आएगा। हमारी आॅफ-स्क्रीन केमिस्ट्री ही स्क्रीन पर दिखी, क्योंकि कहानी में भाईचारा भी है, टकराव भी है और कई इमोशन्स हैं। अगर केमिस्ट्री नहीं होती, तो हम वो सब नहीं दिखा पाते।
पुलकित- जैसा कि दिव्येंदु ने कहा, हमारे रिश्ते में कई लेयर्स हैं. ऐसा नहीं है कि बात नहीं करेंगे तो काम बेहतर होगा, बल्कि हमारी आॅफ-स्क्रीन बॉन्डिंग ने हमें सीन को और बेहतर तरीके से एक्सप्लोर करने में मदद की। जब मैं अपने रोल में सिक्योर हूं और ये अपने रोल में, तो हम साथ मिलकर बेहतर काम करते हैं—जैसे भाई मिलकर कुछ करते हैं।
एक अनुभवी कलाकार सुविंदर विक्की के साथ काम करना आपके लिए कितना खास रहा?
पुलकित – सुविंदर जी कम्प्लीट एक्टर हैं. उनके साथ काम करने से छोटी-छोटी चीजें सीखने को मिली। उन्होंने हमें दिखाया कि अनुभव के बावजूद मेहनत और डिटेलिंग कभी कम नहीं होती, उनके प्रति सम्मान और मेहनत ने मुझे भी अपने काम में सुधार करने की प्रेरणा दी।





