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लोग थिएटर के बजाय मोबाइल पर कंटेंट देखना पसंद कर रहे हैं : सोनिया बंसल

आने वाली फिल्म ‘द लास्ट ब्रीथ’
लखनऊ। सोनिया बंसल जो बिग बॉस से सुर्खियों में आई थीं, अब अपनी आने वाली फिल्म ‘द लास्ट ब्रीथ’ के साथ अपनी क्रिएटिव जर्नी में एक नया और बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार हैं। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी इस फिल्म, करियर के अनुभव, प्रकृति और क्लाइमेट से जुड़े मुद्दों, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और अपने को-एक्टर शिव ठाकरे के साथ काम करने के अनुभव पर खुलकर बात की।

आपकी नई फिल्म ‘द लास्ट ब्रीथ’ के बारे में बताइए. यह किस विषय पर आधारित है?

यह फिल्म क्लाइमेट पर आधारित है. आज के समय में पेड़ों को काटना, फैक्ट्री लगाना बहुत आम हो गया है, लेकिन उसका असर प्रकृति पर कितना पड़ रहा है, यह कोई नहीं सोचता। हमारी फिल्म मुंबई से जुड़ी एक सच्चाई दिखाती है, जहां एक आदिवासी ने पूरे जंगल को कटने से बचाने की कोशिश की. यह कहानी उसी संघर्ष पर आधारित है।

इस फिल्म का आइडिया और स्क्रिप्ट कब और कैसे तैयार हुई?

हम पहले कुछ और बना रहे थे, लेकिन फिर हमारे प्रोड्यूसर और डायरेक्टर ने कहा कि फिल्म फेस्टिवल के लिए कुछ खास करना है, तब मैंने क्लाइमेट पर एक कहानी लिखी. बाद में उसमें कुछ बदलाव किए गए और उसे नए तरीके से डेवलप किया गया।

क्या आपको प्रकृति और क्लाइमेट से जुड़ी चीजों में खास दिलचस्पी है?

बिल्कुल. आज क्लाइमेट बहुत खराब हो चुका है, चाहे मुंबई हो या दिल्ली, लोग सिर्फ डेवलपमेंट की बात करते हैं, लेकिन यह नहीं सोचते कि उसके साथ हमने प्रकृति को कितना नुकसान पहुंचाया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है, आने वाले समय में यह और खतरनाक हो सकता है—ग्लेशियर पिघलेंगे, समुद्र का स्तर बढ़ेगा. यह बहुत गंभीर मुद्दा है।

क्या आपको लगता है कि आपकी फिल्म लोगों को जागरूक करेगी?

समय तो काफी निकल चुका है, लेकिन अगर अब भी लोग जाग जाएं तो शायद कुछ सुधार हो सके। कम से कम पेड़ लगाना शुरू करें, लेकिन आजकल लोग सिर्फ लग्जरी चाहते हैं, प्रकृति को बचाने के बारे में कम सोचते हैं।

आपके को-एक्टर शिव ठाकरे के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

मैं शिव के साथ काम करना हमेशा पसंद करती हूं। हम एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं, इसलिए हमारे बीच एक कम्फर्ट लेवल है. जब इस प्रोजेक्ट की बात हुई तो मैंने तुरंत हामी भर दी।

फिल्मों के अलावा क्या आप ओटीटी पर भी काम करना चाहेंगी?

हां, ओटीटी आज का बहुत मजबूत प्लेटफॉर्म है. लोग थिएटर जाने से ज्यादा मोबाइल पर कंटेंट देखना पसंद कर रहे हैं। मेरे पास ओटीटी के लिए भी प्रोजेक्ट है, लेकिन अभी मैं अपने आने वाले काम पर फोकस करना चाहती हूं।

रियलिटी शो बिग बॉस का आपका अनुभव कैसा रहा? कुछ बताइए.

बिग बॉस मेरे करियर की शुरूआत थी, वहां से मैंने बहुत कुछ सीखा. मैं ज्यादा समय नहीं रही, लेकिन जितना भी समय रहा, मैंने उसे स्वीकार किया। मुझे लगता है हर चीज का एक समय होता है।

आपने अपने स्ट्रगल और करियर को कैसे देखा? कुछ शेयर करना चाहेंगी?

स्ट्रगल हर किसी की जिंदगी में होता है, लेकिन मैं उसे याद करके दुखी नहीं होती, मैं अपनी जर्नी को खुशी से देखती हूं और हंसती हूं कि मैंने क्या-क्या किया। मेरा मानना है कि किसी को दोष देने से कुछ नहीं मिलता, जो हुआ है उसे स्वीकार करना चाहिए।

आपकी सोच काफी शांत और संतुलित लगती है, इसका राज क्या है?

मैं ज्यादा कुछ सोचती नहीं हूं, जो मिल रहा है, उसे स्वीकार करती हूं. मैं मानती हूं कि अगर हम हर चीज को कंट्रोल करने की कोशिश करेंगे तो हम कमजोर हो जाएंगे। इसलिए मैं हर चीज को सहजता से लेती हूँ।

क्या आपको लगता है कि आपने अपने करियर में बहुत कुछ हासिल कर लिया है?

नहीं, मैं कभी यह नहीं मानती कि मैंने बहुत कुछ हासिल कर लिया है. अगर मैं ऐसा सोचने लगूं तो शायद आगे बढ़ना बंद कर दूंगी. मेरे लिए हर दिन नया है और अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

आध्यात्म ने आपकी सोच में क्या बदलाव लाया?
आध्यात्म ने मुझे यह समझाया कि जिंदगी में जो भी हो रहा है, उसे स्वीकार करना चाहिए. अगर कुछ गलत भी हो रहा है, तो उसे लेकर परेशान होने के बजाय उसे समझना जरूरी है। अब मैं हर परिस्थिति में शांति बनाए रखने की कोशिश करती हूं।

इंडस्ट्री में नए लोगों के लिए आपका क्या मैसेज है?

सबसे जरूरी है अपने मन को शांत रखना. यहां बहुत लोग आपको बड़े-बड़े वादे करेंगे, लेकिन आपको खुद समझना होगा कि क्या सही है, किसी के पीछे भागने से बेहतर है खुद पर भरोसा रखें और अपने रास्ते पर चलें।

आपकी फिल्म ‘द लास्ट ब्रीथ’ को लेकर दर्शकों से क्या कहना चाहेंगी?

यह मेरे लिए भी एक खास प्रोजेक्ट है, खासकर क्योंकि यह फिल्म फेस्टिवल से जुड़ी है. मैं बस यही चाहूंगी कि लोग इसे देखें और समझें कि क्लाइमेट कितना बड़ा मुद्दा है। अगर हम अब भी नहीं जागे, तो आगे बहुत मुश्किल हो सकती है।

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