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संभल हिंसा मामले में जांच समिति ने सीएम योगी को सौंपी रिपोर्ट, 30 प्रतिशत घटी हिंदुओं की आबादी

लखनऊ/संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के मामले में गठित न्यायिक जांच समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। लगभग 450 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट में सिर्फ उस दिन की हिंसा का ही नहीं, बल्कि संभल में पिछले कई दशकों में हुई साम्प्रदायिक घटनाओं, जनसंख्या परिवर्तन, और आतंकी गतिविधियों से जुड़े तथ्यों का भी गंभीरता से विश्लेषण किया गया है।

जांच समिति का गठन और उद्देश्य

इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय न्यायिक जांच समिति का गठन किया था। हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश देवेंद्र अरोड़ा को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि रिटायर्ड आईपीएस अफसर एके जैन और पूर्व आईएएस अमित प्रसाद को सदस्य बनाया गया।

रिपोर्ट के अहम बिंदु:

1. संभल में डेमोग्राफिक बदलाव

रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा संभल की जनसंख्या संरचना में हुए डेमोग्राफिक बदलाव को लेकर किया गया है। आजादी के समय संभल नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 45% हिंदू और 55% मुस्लिम आबादी थी। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान समय में हिंदुओं की संख्या घटकर 15-20% के बीच रह गई है, जबकि मुस्लिम आबादी बढ़कर लगभग 85% हो गई है।

2. बार-बार दंगों से बदली स्थिति

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि समय-समय पर हुए दंगों ने न सिर्फ शांति-व्यवस्था को बिगाड़ा, बल्कि एक खास समुदाय के पलायन की वजह भी बने। संभल में आजादी के बाद अब तक कुल 15 बड़े दंगे हो चुके हैं। ये दंगे मुख्यतः 1947, 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 और 2019 में हुए। इससे सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर पड़ा और डेमोग्राफिक असंतुलन बढ़ा।

3. आतंकी गतिविधियों का गढ़ बना संभल

रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि संभल लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के नेटवर्क का हिस्सा रहा है। अल-कायदा और हरकत-उल-मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों की गतिविधियों के सबूत संभल में पाए गए हैं।

अमेरिका द्वारा घोषित एक वैश्विक आतंकवादी मौलाना आसिम उर्फ सना-उल-हक का भी संबंध संभल से रहा है। इसके अलावा इलाके में अवैध हथियारों और नारकोटिक्स का नेटवर्क भी वर्षों से सक्रिय है, जिस पर अब सख्त कार्रवाई की जा रही है।

4. तुष्टिकरण की राजनीति ने बिगाड़ी स्थिति

रिपोर्ट में एक और गंभीर आरोप यह है कि दशकों से चली आ रही तुष्टिकरण की राजनीति ने संभल की स्थिति को बिगाड़ा है। न केवल प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही रही, बल्कि कुछ नेताओं ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए समुदाय विशेष को संरक्षण दिया, जिससे हालात और भी बदतर हुए।

शासन के सामने अब क्या विकल्प?

रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार के सामने अब कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने की चुनौती है। सूत्रों के मुताबिक, सीएम योगी आदित्यनाथ खुद रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं और इसके आधार पर आने वाले दिनों में बड़े प्रशासनिक और कानूनी निर्णय लिए जा सकते हैं। सरकार की ओर से अवैध निर्माणों, अवैध आबादी के बसाव, हथियार तस्करी और आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया जा सकता है। साथ ही, जिन अधिकारियों की लापरवाही रिपोर्ट में चिन्हित की गई है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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