लखनऊ। आशियाना में आयोजित जैन समाज के वषार्योग महोत्सव के अंतर्गत आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान पूज्य उपाध्याय श्री 108 वीहसंत सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि सैनिक और साधु दोनों ही समाज एवं राष्ट्र के सच्चे रखवाले होते हैं। जिस प्रकार सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करता है और बाहरी आक्रमणकारियों तथा अराजक तत्वों से राष्ट्र को सुरक्षित रखता है, उसी प्रकार साधु समाज को कुरीतियों, कुसंगतियों और बुरी प्रवृत्तियों से बचाने का कार्य करते हैं। उपाध्याय श्री ने कहा कि यदि सैनिक न हों तो देश की सीमाएं असुरक्षित हो जाएंगी और विदेशी शक्तियां तथा असामाजिक तत्व राष्ट्र की शांति एवं व्यवस्था को भंग कर सकते हैं। उसी प्रकार यदि समाज में साधुओं का मार्गदर्शन न मिले तो कुरीतियां, बुरी आदतें और विकृत विचारधाराएं तेजी से समाज में फैलने लगेंगी, जिससे परिवारों और समाज में विघटन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए साधु-संत समाज को सदाचार, संयम और संस्कारों की दिशा प्रदान करते हैं। अपने प्रवचन के दौरान उपाध्याय श्री ने धर्म, संस्कार और नैतिक मूल्यों के संरक्षण पर विशेष बल देते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं से जीवन में सदाचार एवं संयम को अपनाने का आह्वान किया। आज की सभा में मुख्य रूप से आदिश कुमार जैन, चंद्रप्रकाश जैन, नलिन राज काजलीवाल, अजय जैन, बृजेश जैन बंटी, अभिषेक जैन, संजीव जैन, राजेश जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि वषार्योग महोत्सव की श्रृंखला में आगामी 9 अगस्त 2026 (रविवार) को राज लक्ष्मी स्वीट हाउस, आशियाना चौराहा, एलडीए कॉलोनी, कानपुर रोड, लखनऊ में राष्ट्रहित में जैन समाज का योगदान विषय पर एक भव्य विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे जैन समाज के सीए, चिकित्सक, अधिवक्ता, प्रोफेसर, अभियंता, सरकारी अधिकारी एवं अन्य विशिष्ट जनों का सम्मान किया जाएगा तथा राष्ट्र निर्माण में जैन समाज की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि इसके उपरांत 12 अगस्त 2026 को पूज्य उपाध्याय श्री 108 वीहसंत सागर जी महाराज का जन्मोत्सव अवतरण दिवस के रूप में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देश के विभिन्न नगरों से सैकड़ों की संख्या में जैन श्रद्धालुओं के लखनऊ पहुंचने की संभावना है। कार्यक्रम को लेकर समाज में विशेष उत्साह एवं तैयारियां चल रही हैं।





