नयी दिल्ली। छह बार की विश्व चैम्पियन और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता एम सी मैरी कॉम को राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है हालांकि उन्हें लगता है कि स्वर्ण पदक जीत पाना मुश्किल होगा। मणिपुर की 43 वर्ष की इस मुक्केबाज ने कहा ,हम पदक जीतेंगे लेकिन मुझे स्वर्ण की उम्मीद नहीं है। अगर मिल जाता है तो मुझे खुशी होगी। राष्ट्रमंडल खेलों में हम फाइनल तक जरूर पहुंचेंगे । मैं प्रार्थना करूंगी कि हम सारे पदक जीतें। उन्होंने कहा,मुक्केबाजी ने मुझे जीवन में सब कुछ दिया है। खेल से इतना कुछ मिलने के बाद यह कैसे संभव है कि मैं वहां खेल रहे अपने खिलाड़ियों के लिये दुआ नहीं करूं। हम एक परिवार हैं।
भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में सात पदक जीते थे जिसमें तीन स्वर्ण और एक रजत शामिल है। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजी दल में सात पुरूष और सात महिला मुक्केबाज शामिल हैं ।भारतीय महिला टीम में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो), दुनिया की नंबर एक मुक्केबाज जैसमीन लम्बोरिया (57 किलो) , एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता प्रीति पवार (54 किलो) और विश्व कप स्वर्ण पदक विजेता अरूंधति चौधरी (70 किलो) शामिल हैं । चारों ने इस साल अप्रैल में एशियाई चैम्पियनशिप में पदक जीते थे ।लड़कों में सचिन सिवाच (60 किलो) और नरेंदर बेरवाल (प्लस 90 किलो) से उम्मीदें हैं ।मैरी कॉम ने कहा, मैं सभी को शुभकामना देती हूं। भारत का प्रतिनिधित्व करना आसान नहीं है, यह बड़ी जिम्मेदारी है । सभी देश के लिये पदक जीतने के इरादे से ही गए होंगे ।
भारतीय मुक्केबाजी के प्रशासनिक पहलू के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा ,अजीब है ।पिछले कुछ महीने से अजय सिंह की अध्यक्षता वाले भारतीय मुक्केबाजी महासंघ की चयन संबंधी विवादों, कोचों की नियुक्ति और राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में रहने की खराब व्यवस्था को लेकर काफी आलोचना हुई है ।
बीएफआई को एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों की अपारदर्शी और अस्पष्ट चयन नीति को लेकर खेल मंत्रालय ने नोटिस भी जारी किया ।मैरी कॉम ने कहा,मुझे समझ में नहीं आता कि कुछ चैम्पियन मुक्केबाजों का चयन क्यो नहीं हुआ । यह भविष्य के लिये अच्छा नहीं है । प्रदर्शन ऊपर नीचे हो सकता है लेकिन चयन सही नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है ।





