योगी सरकार ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य में हासिल की बड़ी उपलब्धि,आशा कार्यकर्ताओं, एंबुलेंस सेवाओं और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का अहम योगदान
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश के 16 जिलों में अप्रैल से जून 2026 के दौरान सभी प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में संपन्न हुए हैं। इस अवधि में इन जिलों में एक भी गैरसंस्थागत यानी घर या अन्य स्थान पर प्रसव दर्ज नहीं किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह उपलब्धि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, गर्भवती महिलाओं में बढ़ी जागरूकता और स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण प्रसूति सेवाएं उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि जिला महिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसूति सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
अस्पतालों में आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी, दवाओं की उपलब्धता और रेफरल व्यवस्था को बेहतर बनाया गया है। एचएमआईएस के आंकड़ों के अनुसार गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, वाराणसी, अमेठी, अयोध्या, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, गाजीपुर, शामली, गाजियाबाद, हाथरस, इटावा, महोबा और कौशांबी में अप्रैल से जून के बीच एक भी गैरसंस्थागत प्रसव नहीं हुआ। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, नियमित जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, आशा कार्यकतार्ओं द्वारा घर-घर संपर्क और एंबुलेंस सेवाओं की उपलब्धता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों की मौजूदगी, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, नवजात देखभाल और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेफरल व्यवस्था से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलती है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के लिए लगातार प्रेरित किया। प्रसव की संभावित तिथि से पहले तैयारी और समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था ने इस उपलब्धि को हासिल करने में अहम भूमिका निभाई। प्रदेश सरकार का कहना है कि 16 जिलों की यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल बनेगी और सुरक्षित मातृत्व के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी।





