अकादमी में सितार वादन की परम्परा पर विशेष साक्षात्कार एवं रिकॉर्डिंग सम्पन्न
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) द्वारा अकादमी अभिलेखागार के अंतर्गत सितार वादन की परम्परा (मैहर-सेनिया घराने के संदर्भ में) विषय पर एक विशेष साक्षात्कार एवं स्टूडियो रिकॉर्डिंग का आयोजन अकादमी स्टूडियो, विपिन खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में प्रख्यात सितार वादक पार्थ प्रतिम राय ने मैहर-सेनिया घराने की परम्परा, उसके ऐतिहासिक विकास, गुरु-शिष्य परम्परा तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत में उसके विशिष्ट योगदान पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मैहर -सेनिया घराने की वादन शैली में राग की शुद्धता, बीन-अंग की गरिमा, ध्रुपद-अंग की गंभीरता, स्वर-सौंदर्य तथा आलाप, जोड़, झाला और गत का संतुलित विकास इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। उन्होंने सितार वादन के तकनीकी पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक श्रेष्ठ सितार वादक के लिए मींड, गमक, जमजमा, मिजराब के बोल, दाएँ-बाएँ हाथ का समन्वय, लय की सटीक समझ तथा राग के स्वरूप की गहन जानकारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता तभी सार्थक होती है, जब उसमें भाव, सौंदर्य और राग की आत्मा का समावेश हो। युवा कलाकारों को संबोधित करते हुए श्री राय ने कहा कि नियमित एवं अनुशासित रियाज ही संगीत साधना का मूल आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतिदिन निश्चित समय पर सुर, लय, मिजराब के बोल, पलटे तथा रागों का क्रमबद्ध अभ्यास करने, गुरु के निदेर्शों का पालन करने और महान कलाकारों की प्रस्तुतियों का नियमित श्रवण करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि धीमी गति में किया गया शुद्ध अभ्यास ही आगे चलकर कलाकार को मंच पर आत्मविश्वास और परिपक्वता प्रदान करता है।
साक्षात्कार एवं स्टूडियो रिकॉर्डिंग के दौरान पार्थ प्रतिम राय ने अनेक रागों के उदाहरण प्रस्तुत किए तथा विशेष रूप से राग खमाज एवं राग नन्द का प्रभावशाली सितार वादन प्रस्तुत कर मैहर-सेनिया घराने की विशिष्ट शैली का सजीव परिचय कराया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित संगीतज्ञों एवं श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई और सौंदर्य का अनुभव कराया। इस अवसर पर प्रख्यात वायलिन वादक भानु प्रताप बनर्जी ने साक्षात्कारकर्ता के रूप में सारगर्भित प्रश्नों के माध्यम से सितार वादन की परम्परा, घराने की विशेषताओं तथा संगीत की विविध तकनीकी एवं सौंदर्यपरक बारीकियों पर विस्तृत संवाद किया एवं तबला संगति पर राजीव सेनगुप्ता ने की। कार्यक्रम में प्रो. जयंत खोत, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, विभा सिंह, उपाध्यक्ष तथा राजकुमार, निदेशक, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के मार्ग दर्शन में हुई। कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. पवन कुमार द्वारा किया गया। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा अभिलेखागार के लिए आयोजित यह साक्षात्कार एवं स्टूडियो रिकॉर्डिंग भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परम्पराओं के संरक्षण, प्रलेखन एवं भावी पीढ़ियों तक उनके व्यवस्थित संप्रेषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।





