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कृषि का विकास जरूरी

हमारे जीवन में कृषि क्षेत्र का क्या महत्व है इसे संस्कृति के इन तीन शब्दों… कृषि मूलश्च जीवनम्, से ही समझा जा सकता है। कारोबारी जीवन में कृषि के महत्व का आकलन करें तो इतना ही काफी है कि आर्थिक सुधारों के तीन दशक बाद भी देश की अर्थव्यवस्था बहुत कुछ कृषि एवं संबंधित क्षेत्र की प्रगति पर निर्भर है। आज भी कृषि सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है।

देश की आधे से अधिक आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है, लेकिन उपेक्षा के कारण कृषि क्षेत्र की प्रगति और इसमें प्रसंस्करण, मूल्य संवर्द्धन जैसी आयजनित गतिविधियों का विकास नहीं हुआ। इसी कारण कृषि क्षेत्र में नियोजित लोगों की आय का स्तर निम्न है और किसान व कृषि में कार्यरत श्रमिक गरीबी के दायरे में हैं। सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने का लक्ष्य रखा है।

वर्तमान संकट के मद्देनजर यह लक्ष्य असंभव है, लेकिन फिर भी अगर नियोजित प्रयास किये जायें तो कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र की आय को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। और यह कोई राकेट शिगूफा नहीं है बल्कि कृषि निर्यात के जो आंकड़े सामने आये हैं उससे भरोसा बढ़ता है कि अगर हम कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देकर उसकी अंतर्निहित संभावनाओं को विकसित करने का प्रयास करें तो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गुणवत्तापरक रोजगार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की प्रगति भी तेज हो सकती है।

अप्रैल से जून तक, चालू वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही के दौरान पूरे दो महीने तक भारत में लॉक डाउन रहा और इस अवधि में दुनिया के अधिकांश देशों में कहीं न कहीं लॉकडाउन की स्थिति रही है। लेकिन महामारी के इस संकट में भी जिस तरह कृषि निर्यात में लगभग 24 फीसद की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 255 अरब रुपये हो गया, उससे स्पष्ट है कि वैश्विक स्तर पर भारत कृषि एवं खाद्य आपूर्ति शृंखला संकट में भी बनाये रखने में सक्षम है।

नब्बे के दशक में चीन का नकल करके हमारे नीति निर्माताओं ने देश में विकास के लिए सेज मॉडल को लागू किया था। स्पेशल इकोनॉमिक जोन के नाम पर तमाम कृषि जमीनों को औद्योगिक समूहों को सौंप दिया गया ताकि वहां सेज विकसित हो, लेकिन आज सेज की बगिया उजड़ चुकी है। जिन्होंने सेज के नाम पर जमीनें लीं उन्होंने वहां औद्योगिक विकास के बजाय कंक्रीट के जंगल लगा दिये।

औने-पौने दामों पर जमीनें हथियाई गयीं और आधारभूत ढांचा खड़ा कर वर्गफुट में बेचकर करोड़ों का वारा-न्यारा किया गया। अगर तब चीन का नकल कर सेज बनाने के बजाय साज अर्थात स्पेशल एग्रीकल्चर जोन विकसित किया जाता और सब्जी, फल, डेयरी, लाइव स्टॉक बिजनेस जैसी संभावनाओं वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां वैल्यू एडीशन, प्रसंस्करण एवं निर्यात गतिविधियों को बढ़ाया जाता तो आज देश के कृषि क्षेत्र का निर्यात कई गुना अधिक होता।

बहरहाल संकट में जिस तरह कृषि क्षेत्र सहारा बनकर खड़ा हुआ है उसके मद्देनजर यह जरूरी है कि अब सरकार तमाम अन्य क्षेत्रों की तरह कृषि को भी निर्यात, आय सृजन और रोजगार के मद्देनजर बढ़ावा दे और इसमें पर्याप्त निवेश कर विकसित करे।

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