प्रभु के 1000 नामों का स्मरण करने से बुद्धि, स्वास्थ्य और मन की एकाग्रता बढ़ती है
लखनऊ। आशियाना में चल रहे पावन वषार्योग के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अत्यधिक जिद्दीपन एवं अत्यधिक भोलापन दोनों ही नरक के द्वार हैं। जीवन में विवेक, संयम और संतुलन अत्यंत आवश्यक है।
गुरुदेव ने आगे कहा कि प्रभु का नाम लेने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं। भगवान के 1000 नामों का प्रतिदिन प्रात:काल श्रद्धापूर्वक स्मरण करने से बुद्धि का विकास होता है, स्वास्थ्य लाभ मिलता है, मन एकाग्र होता है, संकल्प-विकल्प समाप्त होते हैं तथा जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रतिदिन प्रभु स्मरण एवं धर्म आराधना को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। 11 अक्टूबर को वर्ष में एक बार आयोजित होने वाली सरस्वती महाअर्चना का आयोजन होगा। इस अवसर पर लगभग 1200 वर्ष प्राचीन श्री सरस्वती माता जी के दुर्लभ दर्शन होंगे। 2 अगस्त को जैन समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं का प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। 10वीं, 12वीं तथा विभिन्न डिग्रियाँ प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा।





