नई दिल्ली। देश में तेज़ी से वायरल हो रहे सोशल मीडिया अकाउंट ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को सरकार के निर्देश पर माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) ने भारत में ब्लॉक (विथहेल्ड) कर दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने यह सख्त कदम इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) से मिले इनपुट के बाद उठाया है, जिसमें इस अकाउंट को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर जोखिम के रूप में रेखांकित किया गया था। आईबी की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि यह अकाउंट देश के युवाओं के बीच भड़काऊ सामग्री फैलाकर सार्वजनिक व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसी के मद्देनजर सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 69ए के तहत इस अकाउंट को भारत की सीमाओं के भीतर प्रतिबंधित करने का कानूनी आदेश जारी किया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और कानून-व्यवस्था के हित में ऑनलाइन सामग्री को रोकने का अधिकार देती है।
हालांकि, यह प्रतिबंध भौगोलिक रूप से केवल भारत तक ही सीमित है, जिसका मतलब है कि अन्य देशों में यह अकाउंट अभी भी पूरी तरह सक्रिय है और इसके लाखों फॉलोअर्स इसे देख सकते हैं। जब इस डिजिटल आंदोलन की शुरुआत हुई थी, तब एक्स प्लेटफॉर्म पर इसके करीब 90 हजार फॉलोअर्स थे, जो ब्लॉक होने की कार्रवाई तक बढ़कर दो लाख से अधिक हो चुके थे। एक्स प्लेटफॉर्म की ओर से जारी आधिकारिक नीति के अनुसार, जब भी उन्हें किसी वैध सरकारी एजेंसी से उचित कानूनी अनुरोध प्राप्त होता है, तो वे स्थानीय कानूनों का सम्मान करते हुए संबंधित सामग्री की उपलब्धता को केवल उसी विशिष्ट देश की सीमा के भीतर सीमित कर देते हैं। इस बीच, अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस बैन का दायरा बढ़ाने की तैयारी चल रही है; वर्तमान में इस संगठन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 16 मिलियन (1.6 करोड़) से अधिक फॉलोअर्स हैं, जिस पर प्रतिबंध लगाने की कानूनी प्रक्रिया भी प्रशासनिक स्तर पर गति पकड़ चुकी है।
इस पूरे विवाद की जड़ें देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की एक तीखी न्यायिक टिप्पणी से जुड़ी हुई हैं। एक अदालती सुनवाई के दौरान उन्होंने व्यवस्था को चुनौती देने वाले कुछ लोगों के संदर्भ में ‘सिस्टम पर हमला करने वाले कॉकरोच’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसके बाद इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई। इस बयान के विरोध और व्यंग्य के रूप में सोशल मीडिया रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक एक व्यंग्यात्मक डिजिटल मोर्चे की स्थापना कर दी। संस्थापक दिपके का कहना है कि यह युवाओं की एक रचनात्मक और हास्यपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य देश की गंभीर राजनीतिक और सामाजिक बहसों को एक नए और धारदार तरीके से जनता के सामने प्रस्तुत करना है। इस डिजिटल अभियान के सामने आते ही देश के युवाओं और बेरोजगार वर्ग ने इससे बड़े पैमाने पर जुड़ना शुरू कर दिया।
इस अनूठे डिजिटल आंदोलन को लेकर देश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी और बंटी हुई प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां विपक्ष के कुछ बड़े नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा बताते हुए इसका खुला समर्थन किया है, वहीं सत्तापक्ष और अन्य विश्लेषक इसे महज एक प्रायोजित सोशल मीडिया ट्रेंड मान रहे हैं। इस विवाद की गूँज अब जमीनी स्तर पर भी सुनाई देने लगी है; हरियाणा के रोहतक में एक स्थानीय जनप्रतिनिधि ने इस मुद्दे को लेकर औपचारिक विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। उनका तर्क है कि वे व्यवस्था द्वारा ‘कॉकरोच’ कहकर अपमानित किए गए युवाओं और आम जनता के साथ खड़े हैं और शुक्रवार को होने वाले इस प्रदर्शन के जरिए प्रशासन से न्याय तथा नीतिगत जवाबदेही की मांग करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को साइबर सुरक्षा नीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बदलते राजनीतिक परिदृश्य के एक जटिल उदाहरण के रूप में देख रहे हैं। यदि ऐतिहासिक और वैचारिक धरातल पर तुलना की जाए, तो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के पास वर्तमान में कोई ठोस संगठनात्मक या पारंपरिक राजनीतिक जमीन मौजूद नहीं है, जबकि भारत में ‘आम आदमी पार्टी’ जैसी ताकतें पूरी राजनीतिक व्यवस्था को बदलने के लिए एक मजबूत जमीनी आंदोलन तैयार करने के बाद चुनावी राजनीति के अस्तित्व में आई थीं। इसी प्रकार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो नेपाल का हालिया ‘जेन-जी’ आंदोलन वहां की राजनीतिक रूप से खोखली और अप्रभावी हो चुकी व्यवस्था की पृष्ठभूमि में पैदा हुआ था, जबकि बांग्लादेश में हुआ हालिया तख्तापलट और बदलाव मुख्यतः मजहबी कट्टरता और छात्र असंतोष की गहरी जमीनी ताकतों पर आधारित था। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि केवल डिजिटल स्पेस में शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक मोर्चा क्या कोई वास्तविक राजनीतिक आकार ले पाता है या महज एक इंटरनेट फेनोमेनन बनकर रह जाता है।





