श्रम संहिताएं निरस्त करने और न्यूनतम रूपये 42,000 वेतन की मांग पर प्रस्ताव पारित
लखनऊ। यूपीएमएसआरए लखनऊ इकाई की 44वीं वार्षिक आम सभा आज उद्यान भवन, लखनऊ स्थित कॉ. आर.एस. बाजपेई नगर, कॉ. संजय नारंग सभागार, कॉ. ए.ए. खान मंच में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। सभा का उद्घाटन कॉ. शेषनाथ तिवारी, सचिव, एफ.एम.आर.ए.आई. ने किया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की श्रमिक विरोधी व जन विरोधी नीतियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मेहनतकश वर्ग को एकजुट होकर श्रम अधिकारों, सार्वजनिक स्वास्थ्य और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हो रहे हमलों का प्रतिरोध करना होगा। सभा में सचिवीय रिपोर्ट और कोषाध्यक्ष रिपोर्ट सर्वसम्मति से पारित किए गए।
सभा ने सर्वसम्मति से वर्ष 2026-2027 के लिए 25 सदस्यीय नई कार्यकारिणी का चुनाव किया। अध्यक्ष – प्रशांत मेहरोत्रा, सचिव आनन्द शर्मा, कोषाध्यक्ष – सुनील कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष -रवीन्द्र सिंह, कपिल देव यादव और 7 संयुक्त सचिव एवं 13 कार्यकारिणी सदस्य चुने गए। इसके बाद विस्तृत चर्चा के बाद निम्न 8 प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए जिसमें पहला, चार श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए। दूसरा, विक्रय संवर्धन कर्मचारी अधिनियम, 1976 को संरक्षित एवं लागू किया जाए। तीसरा, अस्पतालों में काम करने के अधिकार को सुरक्षित किया जाए। चौथा, फार्मास्यूटिकल विक्रय कर्मचारियों के लिए वैधानिक सेवा नियम बनाए जाएं। पांचवां, ट्रेड यूनियन अधिकारों पर कोई हमला न हो। छठा, रूपये 42,000 प्रति माह न्यूनतम वेतन घोषित किया जाए। सातवां, सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जी.डी.पी. का 5 प्रतिशत आवंटित किया जाए। आठवां, दवाओं पर से जी.एस.टी. समाप्त किया जाए।
सदस्यों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण, संविदाकरण और नौकरी की सुरक्षा पर हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को तेज करने का संकल्प लिया। सभा का समापन एफ.एम.आर.ए.आई., यू.पी.एम.एस.आर.ए. और सी.आई.टी.यू. के आगामी राष्ट्रीय अभियानों को लखनऊ में सफल बनाने के संकल्प के साथ हुआ।





