लखनऊ। शहर में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार सर्वोदय विद्यालय के छात्र-छात्राओं का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। सोमवार को पारा स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की कक्षा छह से 12वीं तक की छात्राएं शिक्षकों की कमी और विद्यालय की अन्य समस्याओं को लेकर सड़क पर उतर आईं। छात्राएं करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर दुबग्गा के हरदोई-कानपुर बाईपास पहुंचीं और तीनों तरफ से सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। इसके बाद वे मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगीं, लेकिन पुलिस ने बालागंज चौराहे पर उन्हें रोक दिया। नाराज छात्राएं वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गईं।
छात्राओं का आरोप है कि विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और बीमार होने पर समुचित इलाज नहीं मिलने की शिकायत भी की। छात्राओं का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
दुबग्गा में करीब दो घंटे तक जिलाधिकारी के आने का इंतजार करने के बाद छात्राएं मुख्यमंत्री आवास की ओर पैदल निकल पड़ीं। उनके आगे बढ़ने की सूचना पर ठाकुरगंज, काकोरी, दुबग्गा और पारा थानों की पुलिस के साथ बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंचीं। बालागंज चौराहे पर पुलिस ने छात्राओं को रोक लिया। एसीपी शकील अहमद समेत पुलिस अधिकारी छात्राओं से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास करते रहे। फिलहाल छात्राओं का प्रदर्शन जारी है।
इससे एक दिन पहले रविवार को समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने विद्यालय का निरीक्षण किया था। हालांकि छात्राओं का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान उनकी समस्याएं नहीं सुनी गईं। इसी के बाद सोमवार को छात्राओं का आक्रोश और बढ़ गया।
शुक्रवार को छात्रों ने भी किया था प्रदर्शन
इससे पहले शुक्रवार को पारा-मोहान रोड स्थित इसी जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के कक्षा आठ से 12वीं तक के छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर स्कूल के बाहर सड़क जाम कर प्रदर्शन किया था। सैकड़ों छात्रों ने करीब दो घंटे तक नारेबाजी की थी। इसी दौरान वहां से गुजर रहे समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री असीम अरुण भी जाम में फंस गए थे। उन्होंने छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और बातचीत के बाद उन्हें विद्यालय वापस भेजा था।
छात्रों ने बताया था कि विद्यालय में छह पूर्णकालिक शिक्षकों की जरूरत है, जबकि चार ही शिक्षक कार्यरत हैं। आठ अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति का मामला अदालत में लंबित है। फिलहाल चार गेस्ट शिक्षकों के सहारे पढ़ाई चल रही है। छात्रों का आरोप था कि गेस्ट शिक्षक भी नियमित रूप से नहीं आते, जिससे पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पा रहा है।
छात्रों ने खेलकूद के सामान की कमी, खराब बिजली व्यवस्था, लाइब्रेरी के समुचित इस्तेमाल न होने और साफ-सफाई समेत कई समस्याएं भी बताई थीं। इसके अलावा नीट और जेईई की तैयारी के लिए चल रही मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग में रसायन विज्ञान के शिक्षक की कमी का मुद्दा भी उठाया गया था। मंत्री असीम अरुण ने छात्रों को समस्याओं के जल्द समाधान का आश्वासन दिया था। एक ही विद्यालय के छात्रों और छात्राओं के लगातार सड़क पर उतरने से अब विद्यालय में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।





