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देर आयद, दुरुस्त आयद

सड़क दुर्घटनाएं ऐसी सचाई हैं जिनसे कोई इनकार नहीं कर सकता है। हर साल दुर्घटना में 1.5 लाख मौतें किसी महामारी जैसी हैं। कानून तोड़कर होने वाली हिंसा में एक-दो मौतें होती हैं तो हाहाकार मच जाता है, मचना भी चाहिए। लेकिन यातायात कानून तोड़ने से हर दिन लगभग 400 सौ मौतें होती हैं पर इसे कोई गंभीरता से नहीं लेता। दुर्भाग्यवश इसे रोकने की गंभीरता कभी किसी ने नहीं दिखाई। नितिन गड़करी जब से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री बने हैं, तभी से सड़कों में सुधार, सड़क सुरक्षा के प्रति कड़े मानक विकसित करने, गाड़ियों के सुरक्षा मानक में सुधार जैसे ठोस प्रयासों के जरिए मौतों को रोकने की दिशा में ठोस पहल कर रहे हैं। एक राजनेता की पहचान भी यही होती है कि राष्ट्रहित में जरूरी फैसले करे, भले ही वह लोगों को पसंद न आये।

 

नया मोटर वाहन कानून ऐसा ही है। नये कानून से जनता, वाहन कंपनी, सड़क ठेकेदार, आरटीओ प्रशासन, सबको परेशानी होगी, लेकिन इसको झेलकर अगर कानून का पालन करना सीख गये तो निश्चय ही सड़कें सुरक्षित होंगी। दरअसल सड़क दुर्घटनाएं और उनमें होने वाली मौतें बहुत कुछ कानूनों का पालन न करने, लापरवाही, अत्यधिक स्पीड, खराब सड़क, खराब सुरक्षा मानक जैसे कारणों से होती हैं। दुर्घटना में नाबालिग बच्चों की मौतें तो एक अलग ही मामला है। अभिभावक बच्चों की जिद में या फिर शान में गाड़ी थमा देते हैं और यही किशोर सड़कों पर जब फर्राटा भरते हैं तो अपने और अन्य लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं। नये मोटर वाहन कानून को विधायी परीक्षा पास करने में वर्षों लग गये। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने जनहित वाले विषय को संसद में ढाई तीन साल तक लटकना पड़ा। यह कानून पिछली लोकसभा में पेश किया गया था। संसदीय समिति की यात्रा करता हुआ आगे बढ़ा, लेकिन लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने से लैप्स हो गया।

 

बहरहाल यह कानून प्राथमिकता में था इसलिए नयी सरकार के पहले ही संसदीय सत्र में इसे लोकसभा के साथ ही राज्यसभा से पास कराकर कानून के गठन का रास्ता साफ कर दिया गया। नये कानून में दुर्घटनाओं को रोकने और सड़क यात्रा को निरापद बनाने के लिए बहुआयामी प्रावधान किये गये हैं। वाहन चालकों पर सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी डाली गयी है तो सड़क बनाने वाले ठेकेदार, वाहन निर्माता कंपनी, आरटीओ,  वाहन मालिक  और अभिभावकों को भी दायित्व सौंपा गया है। कानून का उल्लंघन करने पर फुटकर जुर्माने के बजाय भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। हेलमेट न पहनने, शीटबेल्ट न बांधने पर पांच हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। नाबालिग के गाड़ी चलाने पर 25 हजार जुर्माना या 3 साल की कैद का प्रावधान है। खराब सड़क पर ठेकेदार पर जुर्माना लगेगा, सुरक्षा मानक का पालन न करने पर वाहन निर्माण कंपनी पर जुर्माना लगेगा। इसके साथ ही सड़क पर चलने वाला हरेक वाहन चालक अब बीमा के दायरे में भी होगा। नये कानून में इतने कड़े और व्यापक कि लोगों को परेशानी में डालेंगे, लेकिन इससे दुर्घटना और मौतों में कमी जरूर आयेगी।

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