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त्रिपुष्कर योग, भरणी नक्षत्र में आज मनेगी योगिनी एकादशी

लखनऊ। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि मान्यता है कि इस व्रत को रखने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। साल 2026 में योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा इस एकादशी का विशेष महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि यह व्रत बहुत खास माना जाता है। इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। योगिनी एकादशी के दिन व्रत करके आप समस्त पापों से मुक्ति की प्रार्थना कर सकते हैं। इस व्रत से आपके रोग, दरिद्रता, दुख व कलंक आदि भी दूर रहते हैं। एकादशी व्रत के दिन पीपल के पेड़ पर दीपक जलाना चाहिए और इस दिन तुलसी की पूजा भी की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इससे श्रीहरि का आशीर्वाद मिलता है। इस अवसर पर ठाकुरजी का आकर्षक शृंगार, विशेष पूजन, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा। इस बार योगिनी एकादशी पर त्रिपुष्कर योग का शुभ संयोग बन रहा है।योगिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा, संयम और विधि-विधान से करने पर व्यक्ति को पापों से मुक्ति, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि तथा अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत में चावल नहीं खाया जाता है। चावल से श्रीहरि की पूजा भी नहीं की जाती है। मां लक्ष्मी और विष्णु जी को शंख से स्नान करवाकर उनके मंजरी युक्त तुलसी अर्पित करनी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इससे श्रीहरि प्रसन्न होते हैं और आपके लिए सुख समृद्धि देते हैं।

कितने बजे से शुरू होगी एकादशी तिथि
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8.16 बजे से एकादशी तिथि का प्रवेश होगा। एकादशी तिथि 11 जुलाई को सुबह 5:00 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर गृहस्थजन 10 जुलाई को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। व्रती अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के बाद पारण करेंगे जबकि वैष्णव 11 को व्रत रखेंगे। इस बार एकादशी के दिन भरणी नक्षत्र और त्रिपुष्कर योग बन रहा है। जो श्रीहरि की पूजा के लिए खास मानी जाती है।

योगिनी एकादशी का महत्व
यह एकादशी बहुत खास माना जाता है।एकादशी बहुत खास है, इस एकादशी के व्रत से कई यज्ञों का फलआपको मिलता है। जो यह व्रत रखता है, उसके सभी पाप दूर हो जाते हैं और व्यक्ति लाभ पाता है। इस व्रत को जो रखता है, उसे श्रीहरि की शरण मिलती है। इसके अलावा जुलाई में शुक्ल पक्ष में कौन सी एकादशी है और इस एकादशी पर क्या व्रत किया जाता है, यह भी आप जान सकते हैं।
इस व्रत की कथा किससे जुड़ी है?
अलकापुरी के राजा कुबेर के रसोइए हेममाली ने अपने कर्तव्यों की अवहेलना कर रूद्र द्रव्य की चोरी की। उसके इस पाप के कारण उसे कोढ़ हो गया और वह धरती पर कष्ट झेलने लगा। नारद मुनि के कहने पर उसने योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिससे उसे कोढ़ से मुक्ति मिली और पुन: दिव्य शरीर प्राप्त हुआ।

योगिनी एकादशी व्रत का फल:
हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि योगिनी एकादशी का फल जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति दिलाता है। यह व्रत करने वाला व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। इस व्रत के भगवान से भगवान विष्णु की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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