लखनऊ। जुलाई माह की मासिक शिवरात्रि आषाढ़ के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, जिसे आषाढ़ शिवरात्रि भी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। मान्यता है कि महादेव की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस बार की मासिक शिवरात्रि विशेष मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन दो शुभ योग बन रहे हैं, हालांकि रात्रि के समय भद्रा का प्रभाव भी रहेगा। वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 12 जुलाई को रात 10:29 बजे शुरू होगी और 13 जुलाई को शाम 6:49 बजे तक रहेगी। निशिता काल के आधार पर मासिक शिवरात्रि 12 जुलाई, रविवार को मनाई जाएगी। इस बार शिवरात्रि पर वृद्धि योग और ध्रुव योग का शुभ संयोग बन रहा है। वृद्धि योग सुबह से लेकर रात 8:06 बजे तक रहेगा, जिसे किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत के लिए अनुकूल माना जाता है। इसके बाद ध्रुव योग शुरू होगा, जो अगले दिन शाम 4 बजे तक रहेगा और स्थायी कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। साथ ही, रोहिणी नक्षत्र सुबह 8:29 बजे तक रहेगा, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ होगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
भक्त पूरे दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं, लेकिन निशिता काल की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन निशिता पूजा का समय 13 जुलाई को रात 12:07 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा।
भद्रा का प्रभाव
इस बार आषाढ़ शिवरात्रि की रात्रि में भद्रा काल भी रहेगा, जो 12 जुलाई रात 10:29 बजे से शुरू होकर 13 जुलाई सुबह 5:32 बजे तक रहेगा। हालांकि, इस भद्रा का निवास स्वर्ग लोक में माना गया है, इसलिए इसका पृथ्वी पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे में श्रद्धालु पूरे दिन निश्चिंत होकर पूजा-पाठ और शुभ कार्य कर सकते हैं।
पूजा विधि:
शिवरात्रि व्रत में शिव की पूजा प्रदोष काल यानि दिन और रात के मिलन के समय की जाती है। इसलिए प्रदोष काल में पूजा करें। उपवास में अन्न नहीं खाया जाता है, इसलिए व्रत में किसी भी प्रकार का अन्न ग्रहण न करें। दोनों वक्त फलाहार ही करें। शिव पूजा में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व प्रदान किया गया है। इसलिए इस दिन रुद्राभिषेक अवश्य करें। जलाभिषेक भी कर सकते हैं। शिव जी की पूजा में शिव स्तुति, शिव पंचाक्षर मंत्र, शिव अष्टक, शिव चालीसा, शिव के श्लोक और सहस्त्र नाम का पाठ किया जाता है। शिव पूजन में ॐ नम: शिवाय के उच्चारण को भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए पूजा के समय कम से कम 108 बार ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।





