लखनऊ। अपनी सूफियाना आवाज और अलग अंदाज के लिए मशहूर गायक कैलाश खेर आज करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करते हैं , उनकी गिनती बेहतरीन गायकों में होती है , उन्होंने तकरीबन 23 साल के अपने करियर में एक से बढ़कर एक गाने दिए हैं। खासकर क्लासिकल और सूफी संगीत में उन्होंने महारत हासिल की है , उन्हें अपनी शानदार गायकी के लिए कई अवॉर्ड भी मिल चुके हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ था और वह बचपन से ही संगीत के माहौल में पले-बढ़े हैं. उनके पिता मेहर सिंह खेर लोक गायक थे। इसी वजह से उनका रुझान संगीत की तरफ हो गया। कई स्टूडियोज के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती थी। उन दिनों उनके पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे, इसलिए वह सिर्फ वड़ा पाव और चाय पीकर पूरा दिन गुजार देते थे। इसके बाद उनके एक दोस्त ने उनकी मुलाकात संगीतकार राम संपत से कराई, जो विज्ञापनों के लिए जिंगल्स बनाते थे। कैलाश की आवाज में ऐसा जादू था कि उन्होंने देखते ही देखते पेप्सी और कोलगेट जैसे बड़े ब्रांड्स के लिए 300 से ज्यादा जिंगल्स गा डाले।
बिजनेस के कारोबार में हुआ था तगड़ा नुकसान
कैलाश खेर ने शुरूआत में संगीत के बजाय बिजनेस में भी किस्मत आजमाने का फैसला किया था. अपने एक दोस्त के साथ मिलकर उन्होंने हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट का बिजनेस शुरू किया था. उन्हें उम्मीद थी कि कारोबार में सफलता मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बिजनेस पूरी तरह से फेल हो गया और उन्हें तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा. इस असफलता का असर उनकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ा और वह डिप्रेशन में चले गए. उन्होंने खुद को पूरी तरह से टूटता हुआ महसूस किया।
जिंदगी से हारकर नदी में लगाई छलांग
इस कठिन समय में कैलाश खेर ने खुद को संभालने की कोशिश की और कुछ समय के लिए ऋषिकेश चले गए. वहां उन्होंने गंगा किनारे साधु-संतों के बीच समय बिताया, लेकिन असफलता ने उन्हें इस तरह तोड़ दिया कि वह डिप्रेशन में चले गए और शांति की तलाश में भटकते रहे. ऋषिकेश में उन्होंने संन्यासी बनने की भी कोशिश की. एक दिन निराशा के काले बादलों ने उन्हें इस कदर घेर लिया कि उन्होंने गंगा नदी में कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश भी की. हालांकि, एक शख्स ने उन्हें पानी से बाहर निकाला और उनकी जान बचाई।
2001 में मुंबई पहुंचे
इसके बाद ऋषिकेश ने कैलाश खेर के सोचने का नजरिया बदल दिया. वहां के भजन, कीर्तन और आध्यात्मिक माहौल ने उन्हें नई ऊर्जा दी. इसी दौरान उन्होंने फैसला किया कि अब वह पूरी तरह संगीत को ही अपना जीवन बनाएंगे. इसके बाद साल 2001 में कैलाश खेर मुंबई पहुंचे और अपने संगीत करियर की नई शुरूआत की। शुरूआती दिनों में उन्होंने विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाए और छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स पर काम किया. काम पाने के लिए उन्हें मुंबई में इधर-उधर भटकना पड़ा।
इस गाने से खुला किस्मत का दरवाजा
साल 2003 में कैलाश खेर की जिंदगी का किस्मत का दरवाजा हमेशा के लिए खुल गया. उन्हें अक्षय कुमार की फिल्म ‘अंदाज’ में ‘रब्बा इश्क ना होवे’ गाना गाने का बड़ा मौका मिला। यह गाना रिलीज होते ही हर किसी की जुबान पर चढ़ गया और हर कोई उनकी आवाज का दीवाना हो गया , इसके बाद ‘अल्लाह के बंदे हंस दे’ ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई। इन गानों से कैलाश खेर रातोंरात स्टार बन गए।
कैलाश खेर के 5 बेहतरीन गाने
वहीं, कैलाश खेर के 5 बेहतरीन गानों की बात करें तो इसमें ‘सैयां’ सबसे पहले आता है। यह उनका सबसे पॉपुलर गानों में से एक है। यह गाना इतना मुश्किल है कि अच्छे-अच्छे लोगों के लिए भी इसे गाना आसान नहीं है. कैलाश खेर का गाना ‘तेरी दीवानी’ भी लोगों को काफी पसंद है। इस गाने को उन्होंने स्टेज पर अचानक बनाया था और बाद में इसे आॅफिशियल तौर पर रिकॉर्ड किया गया. सिंगर का गाना ‘अल्लाह के बंदे हंस दे’ तो आपने कई बार सुना होगा। इस गाने को लोग आज तक नहीं भूल पाए हैं। ‘या रब्बा’ गाना भी आपने जरूर सुना होगा। इस गाने की लाइनें आपका दिल छू लेंगी। आपने ‘अर्जियां’ भी जरूर सुना होगा। इस गाने को कैलाश खेर के साथ-साथ जावेद अली ने भी गाया है। ये सभी गाने कैलाश खेर के काफी हिट हैं और इनके अलावा भी कई गाने हैं, जिन्हें लोग सुनना पसंद करते हैं।





