लखनऊ। अंजुमन गुलजारे पंजतन ने हुसैनाबाद के इमामबाड़ा मोहम्मद अली शाह छोटा इमामबाड़ा में याद-ए-जनाब-ए-सकीना का आयोजन किया। हर साल की तरह इस साल भी मोर्हरम के अंतिम रविवार को याद-ए-जनाब-ए-सकीना में मौलाना की तकरीर के बाद अकीदतमंदों को कैदखाना-ए-शाम की शबीह की जियारत करायी गयी। दोपहर दो बजे से तिलावते कलामे पाक से शुरू हुए आयोजन में पहले शायरों ने बारगाहे इमाम हुसैन में अपने कलामों से नजराना-ए-अकीदत पेश की। इसके बाद मजलिस को दिल्ली से आये मौलाना नामदार अब्बास ने खिताब किया। मजलिस के दौरान मौलाना ने इमाम हुसैन और उनकी चार साल की बेटी हजरत जनाबे सकीना पर हुए जुल्मों को बयान किया। जिसको सुनकर अकीदतमंद अश्कबार हो उठे। मौलाना ने अपने बयान में बताया कि इमाम हुसैन की चार साल की बेटी को तीन दिन भूखा और प्यासा रखे जाने के बाद उन्हें मैदाने कर्बला से शाम ले जाया गया, जहां उन्हें कैद कर दिया गया। उसी कैदखाने में बीबी सकीना शहीद हो गईं। यादे सकीना में जनाबे सकीना के चाहनें वालों को उसी कैदखाना-ए-शाम की शबीह की जियारत करायी गयी। कैदखाना-ए-शाम की शबीह की जियारत करते ही अकीदतमंद फूट-फूटकर रोने लगे। मजलिस के बाद जीशान आजमी ने तकरीर में बीबी जनाबे सकीना पर हुए जुल्म और अपने वालिद इमाम हुसैन से उनकी मोहब्बत और फूफी जनाबे जैनब और भाई इमाम जैनुलआब्दीन के साथ गुजरी मुसीबतों का जिक्र किया। इस दौरान अजादारों को हजरत अब्बास के अलम, इमाम जैनुलआब्दीन (अस) के ताबूत, हजरत अली असगर के झूले और दुलदुल की भी जियारत करवायी गयी। कार्यक्रम में शहर की विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी करके इमाम हुसैन को उनकी चहेती बेटी जनाबे सकीना का पुर्सा दिया। यादे जनाबे सकीना की अलविदाई मजलिस को मौलाना हैदर अब्बास दानिश ने खिताब किया। जिसमें उन्होंने जनाबे सकीना के मसाएब बयान किये। इसके बाद आयोजक अंजुमन गुलजारे पंजतन ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। अंजुमन के साहबे बयाज दिलावर हसन ने कैद खाने में यह कहती थी सकीना भाई, जुल्म आदां ने किया हम पे यह कैसा भाई नौहा पढ़ा। जिस पर सीनाजनी करके जनाबे सकीना को याद किया गया। इस दौरान भरी संख्या में अकीदतमंदों ने खासतौर से महिलाओं और छोटी बच्चियों ने शिरकत की।





