शास्त्रीयता और लय का सुंदर समन्वय देखने को मिला
लखनऊ। विश्व नृत्य दिवस के अवसर पर भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में एक गरिमामय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. मांडवी सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति गुरु वंदना रही, जिसे इलाक्षी राठौर द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात भरतनाट्यम की प्रस्तुति शिव स्तुति भो शंभो कुशा अपूर्वा नारायण, नम्रता गौतम, खुशी मौर्य, श्वेता शुक्ला, शिंजिनी एवं अर्पिता राजपूत द्वारा प्रस्तुत की गई। इसके बाद अष्टपदी की भावपूर्ण प्रस्तुति सैयद शमशुर रहमान, दीप्ति सिंह, कीर्ति सिंह, दीपिका एवं गरिमा द्वारा दी गई।
पुष्पांजलि एवं जातिस्वरम की संयुक्त प्रस्तुति शैलेन्द्र कुमार, आस्था केशरी, सोनम अवस्थी, निर्मल भंडारी, काव्यांजलि पांडेय, अंजलि कुमारी, धृति पांडेय, भाव्या शंकर एवं नेहार्शी वर्मा द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें शास्त्रीयता और लय का सुंदर समन्वय देखने को मिला। संगत में डॉ. आरती नाटू (नट्टुवंगम), श्री सुधीर कुमार (मृदंगम), श्रीमती ललिता गणेश (गायन), श्री संजरी साहू (वायलिन) एवं श्री उदित (बांसुरी) का सराहनीय योगदान रहा। इसी क्रम में कथक की आकर्षक प्रस्तुति प्रस्तुत की गई, जिसमें शिव स्तोत्रम से प्रारंभ कर मत्त ताल (18 मात्राओं) में पारंपरिक कथक संरचना प्रस्तुत की गई तथा समापन अष्टपदी निरतत ढंग के साथ हुआ। इस प्रस्तुति में रुंजुन, शैलेन्द्र, अन्नेशा, श्वेता, वैभवी, वल्लरी, तनिष्का एवं गर्गी ने भाग लिया। कलाकारों ने सशक्त पाद-संचालन, लयकारी, भाव-अभिनय एवं मनोहारी चक्करों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगत में पढ़ंत एवं मंजीरा पर डॉ. रुचि खरे, तबला पर श्री अनिर्वाण तालुकदार, हारमोनियम एवं गायन पर जौहर सर तथा बांसुरी पर श्री उदित का सराहनीय योगदान रहा।
द्वितीय चरण में शिव वंदना अंशिका त्रिपाठी, कृति सिंह तोमर, दर्शिका पाठक, प्रज्ञा पाठक एवं योगिता त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात ताल पक्ष (द्रुत लय) की ऊजार्वान प्रस्तुति दिव्या रावल, प्रिया कश्यप, कावेरी, श्रेयांशी श्रीवास्तव, अदिति त्रिपाठी, निखिल कसौधन एवं नितिन कुमार भारती द्वारा दी गई। इसमें पढ़ंत डॉ. प्रेरणा राणा, तबला श्री अनिर्वाण तालुकदार, गायन आरिफ खान एवं सारंगी पर मनीष मिश्रा की संगत विशेष रूप से सराहनीय रही। कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने अपने संबोधन में नृत्य को संस्कृति, अनुशासन एवं साधना का सशक्त माध्यम बताया। कार्यक्रम का संचालन पावनी अवस्थी द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया। यह आयोजन संस्थान की सांस्कृतिक गरिमा को सुदृढ़ करते हुए दर्शकों के लिए अत्यंत मनोहारी एवं स्मरणीय सिद्ध हुआ।





