बली प्रेक्षागृह में गूंजे सुरों के रंग
लखनऊ। सुर, लय और ताल के अद्भुत समन्वय के साथ तबला नवाज शेख मोहम्मद इब्राहिम की संगीतमय यात्रा लय और सुर के सफर का रजत जयंती समारोह बुधवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में हुआ। फ़्यूजन संगीत की इस प्रस्तुति ने शास्त्रीय गहराई, लोक मिठास और पाश्चात्य रंगों को एक मंच पर सजीव कर दिया। कार्यक्रम विश्वविख्यात तबला वादकों उस्ताद अल्ला रक्खा एवं जाकिर हुसैन को समर्पित रहा।
कार्यक्रम की शुरूआत राग यात्रा इंटरनेशनल फ्यूजन बैंड के 11 सदस्यीय दल द्वारा शेख मोहम्मद इब्राहिम के निर्देशन में हुई। राग मिश्र किरवानी, दरबारी कानड़ा एवं पहाड़ी पर आधारित रचनाओं को एकताल, तीनताल, कहरवा तथा दादरा ताल में सुंदरता से निबद्ध किया गया। आलाप, विस्तार, खयाल, तानों की जटिलता तथा वाद्यों की जुगलबंदी और सवाल-जवाब की शैली ने श्रोताओं को प्रारंभ से अंत तक बांधे रखा। प्रस्तुति में शेख मोहम्मद इब्राहिम ने तबला, चण्डा, मादल, इलेक्ट्रॉनिक पर्कशन, टॉपस्टिक, घुंघरू एवं थंडर ड्रम पर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। ढोलक, जेम्बे, हुड़का, मर्कस पर अरुण मिश्रा; रामकुंडली, बंसी, हुड़का, ढोल, डफ, मर्कस पर सिराज अहमद; अन्य वाद्यों पर कमल गुप्ता, प्रखर प्रताप सिंह, अलका श्रीवास्तव, सौरभ सोनवानी, हर्षल कुमारसे, सम्राट राजकुमार, नयन सिंह व अंजलि पटेल ने संगत की। द्वितीय प्रस्तुति में युवा कलाकार दिव्यांशी राज एवं विद्युत गांगुली ने एकल तबला वादन में तीनताल पर आधारित कायदे, टुकड़े एवं चक्करदार रचनाओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। बाल कलाकार अनुज महेंद्रू ने लोग कहते हैं, नीयत-ए-सौख जैसी गजलों की प्रस्तुति देकर वाहवाही बटोरी। लोक संस्कृति पर आधारित तृतीय प्रस्तुति में नलिनी त्रिपाठी, मुदिता पांडेय एवं अंशिका ने गोदना गीत तथा चकिया गीतझ्र पीसना पीसन लागी जैसी पारंपरिक लोकधुनों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। वाद्य संगत में प्रखर प्रताप सिंह, दिलीप त्रिवेदी, अनुपमा राय, जीशान अब्बास, पिंकी श्रीवास्तव एवं अंश का विशेष योगदान रहा। संचालन राजेंद्र विश्वकर्मा ने किया।





