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विश्वकर्मा पूजा 17 को, कल-कारखानों में होगी विशेष पूजा

कारीगरों, शिल्पकारों, इंजीनियरों और औद्योगिक मजदूरों द्वारा मनाया जाता है
लखनऊ। हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा भगवान ब्रह्मा के 7वें पुत्र हैं, जिन्होंने ब्रह्मांड को बनाने में ब्रह्मा जी की मदद की थी। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला वास्तुकार व शिल्पकार माना जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से कारीगरों, शिल्पकारों, इंजीनियरों और औद्योगिक मजदूरों द्वारा मनाया जाता है। इस दिन यह लोग अपने औजारों और मशीनों की पूजा करते हैं। यह त्योहार उस दिन मनाया जाता है जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य 17 सितंबर को देर रात 01 बजकर 55 मिनट पर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इस बार विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी।

विश्वकर्मा पूजा मुहूर्त
इस बार विश्वकर्मा पूजा का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 33 मिनट से सुबह 05 बजकर 20 मिनट तक रहो। विजय मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से दोपहर 03 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 24 मिनट से शाम 06 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल का समय:
विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से दोपहर 01 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। राहुकाल के समय पूजा-पाठ व शुभ कार्यों की मनाही होती है। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को शुभ काल नहीं माना गया है।

विश्वकर्मा पूजा क्यों मनाई जाती है:
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, कन्या संक्रांति के दिन ही भगवान विश्वकर्मा का अवतरण हुआ था। यह दिन भगवान विश्वकर्मा के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करते हैं और अपने काम में सफलता व समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि विश्वकर्मा पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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