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कैपिटल हिंसा मामले में अमेरिकी सीनेट ने सुनाया फैसला, डोनाल्ड ट्रंप बरी

वाशिंगटन। अमेरिका की सीनेट देश के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाई और इसी के साथ उन्हें शनिवार को बरी कर दिया गया। रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े ट्रंप पर छह जनवरी को अमेरिकी कैपिटल (संसद भवन) में हिंसा भड़काने के आरोप थे जिसमें एक पुलिस अधिकारी सहित पांच व्यक्तियों की मौत हो गई थी।

ट्रंप के खिलाफ सीनेट में महाभियोग के पक्ष में 57 मत और इसके विरोध में 43 मत पड़े। ट्रंप को दोषी साबित करने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत के लिए 10 और मतों की आवश्यकता थी। रिपब्लिकन पार्टी के सात सदस्यों ने भी ट्रंप के खिलाफ मतदान किया। ट्रंप (74) पर आरोप था कि अमेरिकी कैपिटल में छह जनवरी को उनके समर्थकों ने जो हिंसा की थी, वह उन्होंने भड़काई थी। उक्त हिंसा में एक पुलिस अधिकारी सहित पांच व्यक्तियों की मौत हो गई थी।

ट्रंप अमेरिकी इतिहास में पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं जिनके खिलाफ प्रतिनिधि सभा द्वारा दो बार महाभियोग की कार्वाई शुरू की गई है। वह पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने पद छोडऩे के बाद महाभियोग की कार्वाई का सामना किया। उन्हें पहली बार सीनेट ने पांच फरवरी 2020 को इन आरोपों से बरी किया था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया। डेमाक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने ट्रंप पर आरोप लगाया था कि उन्होंने दिसम्बर 2019 में नवम्बर के चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन की छवि धूमिल करने के लिए यूक्रेन पर दबाव डाला था।

सात रिपब्लिकन सीनेटरों – बिल कैसिडी, रिचर्ड बर, मिट रोमनी, सुसान कोलिन्स, लिसा मुर्काेव्स्की, बेन सासे और पैट टूमी ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के पक्ष में वोट दिया। यदि उन्हें दोषी ठहराया गया होता तो सीनेट उन पर फिर से पद के लिए चुनाव लडऩे पर रोक लगा देती। ट्रंप ने अभी तक बाइडन से अपनी पराजय स्वीकार नहीं की है। रिपब्लिकन पार्टी के सात सीनेटरों द्वारा ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के समर्थन में मतदान करने के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी पूर्व राष्ट्रपति को दोषी ठहराने के लिए आवश्यक 67 मत हासिल नहीं कर पाई।

ट्रंप ने उन्हें बरी किए जाने के बाद एक बयान जारी करके कहा, किसी भी राष्ट्रपति को पहले कभी यह नहीं झेलना पड़ा। उन्होंने कहा, यह बहुत दुखद है कि एक राजनीतिक दल को कानून के शासन को कलंकित करने, कानून लागू कराने वालों का अपमान करने, भीड़ को बढ़ावा देने, दंगाइयों को माफ करने और न्याय को राजनीतिक प्रतिशोध के माध्यम के रूप में बदलने की खुली छूट दी गई। उसे उन सभी विचारों एवं लोगों के खिलाफ अभियोग चलाने, उन्हें काली सूची में डालने, रद्द करने या दबाने की अनुमति दी गई, जिनसे वे असहमत हैं। ट्रंप ने कहा, मैं हमेशा कानून के शासन, कानून लागू कराने वाले नायकों और बिना द्वेष के मामलों पर शांतिपूर्ण एवं सम्माजनक तरीके से बहस करने के अमेरिकियों के अधिकारों का समर्थक रहा हूं और रहूंगा।

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