दुबई । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की उस मांग का मजाक उड़ाया है, जिसमें तेहरान ने अमेरिका और इजराइल की ओर से की गई बमबारी से हुए नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति की मांग की है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के वार्ताकारों ने अब तक बातचीत के दौरान इस तरह की कोई मांग उनके सामने नहीं रखी थी। उन्होंने इसके जवाब में ईरान से अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग कर दी।ट्रंप की यह टिप्पणी ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई के बयान के बाद आई। बघई ने कहा था कि जब तक अमेरिका ईरान की शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलेगा। ईरान की मांगों में अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करना और विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को जारी करना शामिल है।
ईरान ने इसके साथ ही अमेरिका से युद्ध के दौरान हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति की भी मांग की है। बघई ने कहा कि अमेरिका को अपनी गैर-कानूनी और विनाशकारी गतिविधियों को रोकना चाहिए तथा उससे हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस मांग का जवाब देते हुए कहा कि अब वह ईरान से उन लोगों के लिए क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं जो सड़क किनारे हुए बम विस्फोटों और अन्य संघर्षों में मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए। अमेरिकी सरकार लंबे समय से ईरान समर्थित समूहों को अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों के खिलाफ हुई कई हिंसक घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराती रही है।
अमेरिका ने पिछले कई दशकों के दौरान ईरान समर्थित चरमपंथी संगठनों पर सैकड़ों अमेरिकियों की मौत और घायल होने का आरोप लगाया है। इनमें 1983 में बेरूत स्थित अमेरिकी मरीन परिसर में हुआ बम धमाका भी शामिल है, जिसमें 241 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। इसके अलावा 2003 से 2011 के बीच इराक में कम से कम 603 अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए भी ईरान समर्थित लड़ाकों को जिम्मेदार ठहराया गया है।ट्रंप ने अपने बयान में एक और मांग जोड़ते हुए कहा कि ईरान को उन ईरानी प्रदर्शनकारियों के परिवारों को भी मुआवजा देना चाहिए, जो विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि भविष्य में ईरान के साथ होने वाली सभी वार्ताओं में इस मुद्दे को मजबूती से उठाया जाए।
ट्रंप की इस प्रतिक्रिया से अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने के संकेत मिले हैं। दोनों देशों के बीच विवाद में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के समुद्री व्यापार में होने वाले कुल तेल परिवहन का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इसके लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर अंतरराष्ट्रीय बाजार और प्रमुख देश करीबी नजर रख रहे हैं।
यह मुद्दा अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। नवंबर में अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अमेरिकी राजनीतिक बहस के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकते हैं। ट्रंप के ताजा बयान से यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के साथ किसी भी संभावित बातचीत में केवल तेहरान की मांगों पर चर्चा करने के बजाय अपने पुराने दावों और नुकसान की भरपाई का मुद्दा भी उठाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत की राह और अधिक जटिल हो सकती है।





