बैठक के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
ढाका। भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के दिनों में बढ़ी तल्खी के बीच बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग एक बार फिर दोहराई है। यह मांग सोमवार को ढाका में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के बीच हुई पहली मुलाकात के दौरान रखी गई। करीब आधे घंटे चली इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री रहमान ने भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाने की उम्मीद जताई। बयान के अनुसार, बैठक के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
पीएमओ ने कहा कि बैठक में बांग्लादेश और भारत के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने और साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर चर्चा की।ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तारिक रहमान को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बांग्लादेश सरकार और वहां की जनता के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्योन्मुखी तरीके से काम करने की भारत की मंशा भी व्यक्त की।
नई दिल्ली स्थित बांग्लादेशी उच्चायोग ने भी ‘एक्स’ पर बैठक की जानकारी साझा की। उसके अनुसार, यह मुलाकात लगभग 30 मिनट चली और इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों तथा साझेदारी को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।त्रिवेदी के ढाका में भारतीय उच्चायुक्त का पद संभालने के छह सप्ताह से अधिक समय बाद प्रधानमंत्री रहमान के साथ यह उनकी पहली शिष्टाचार मुलाकात थी। वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उच्चायुक्त के रूप में उन्हें केंद्रीय मंत्री का दर्जा प्राप्त है। वह इस राजनयिक पद को संभालने वाले पहले नेता हैं।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। भारत ने उन्हें सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है। सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को प्रस्तावित है।भारत-बांग्लादेश संबंधों में हालिया तनाव की एक प्रमुख वजह शेख हसीना से जुड़ा घटनाक्रम है। पांच अगस्त को नई दिल्ली में हसीना ने पत्रकारों को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि जेल या मौत की सजा के खतरे के बावजूद उनका दिसंबर में बांग्लादेश लौटने और देश में लोकतंत्र बहाल करने का दृढ़ इरादा है।
हसीना के इस संबोधन पर बांग्लादेश सरकार ने नाराजगी जताई थी। ढाका ने कहा था कि इस तरह की गतिविधि से बांग्लादेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बांग्लादेश ने हसीना को फरार बताया है और उन पर मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया है।हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने सात अगस्त को स्पष्ट किया था कि हसीना से संबंधित उस मीडिया कार्यक्रम में भारत की कोई भूमिका नहीं थी। मंत्रालय ने यह भी कहा था कि कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश सरकार के बारे में कही गई किसी भी बात का भारत समर्थन नहीं करता।
शेख हसीना को अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद सत्ता से हटा दिया गया था। इसके बाद वह भारत चली आई थीं। नवंबर 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कथित मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उन्हें उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद से बांग्लादेश लगातार भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है। सोमवार की बैठक में इस मांग का दोहराया जाना ऐसे समय हुआ है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में उच्चस्तरीय संपर्क और संभावित बैठकों से दोनों देशों के बीच मौजूदा मतभेदों को कम करने की दिशा में प्रगति की उम्मीद की जा रही है।





