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साधारण सास बहू वाली कहानी नहीं है शो ‘तू ही रे दिल’ : प्रियांशी यादव

लखनऊ। पांड्या स्टोर और डोरी के बाद अब अभिनेत्री प्रियांशी यादव तू ही रे दिल धारावाहिक में वृंदा की भूमिका निभा रही हैं। प्रियांशी के अनुसार, जी टीवी पर प्रसारित होने वाला यह शो पारंपरिक सास बहू वाले से अलग प्यार और रिश्तों की कहानी है। तू ही रे दिल में धारावाहिक को लेकर प्रियांशी कहती हैं, मैंने अभी तक जो भी काम किया है, वृंदा की भूमिका उनसे पूरी तरह से अलग है। मॉक शूट के दौरान जब मुझे पहली बार स्क्रिप्ट मिली तो मैंने देखा कि यह इतनी बारीकी से लिखी गई है कि उसमें हर सीन की भावनाएं झलक रही हैं। वृंदा भले ही सिर्फ 19 साल की है, लेकिन गंभीर परिस्थितियों को भी वह परिपक्वता से संभालना जानती है। यह साधारण सास बहू वाली कहानी नहीं है। हमारी कहानी में रिश्ते, जुड़ाव, भावनाएं और परिवार से जुड़ी बातें दिखाई गई हैं। हमारे शो में हर पात्र का सफर, उससे जुड़े सही कारणों के साथ दिखाया जा रहा है।

भाग्य से ज्यादा भगवान पर भरोसा
धारावाहिक में भाग्य वृंदा का हमेशा साथ देता है, लेकिन निजी जिंदगी में भाग्य के भरोसे को लेकर प्रियांशी कहती हैं, अक्सर लोग कहते हैं कि आपको वही मिलता है, जो आपके भाग्य में लिखा होता है। हालांकि, मेरा सोचना है कि आपके साथ वही होता है, जो भगवान चाहेंगे। अगर मेरे भाग्य में कुछ गलत भी लिखा होगा, लेकिन भगवान मेरे साथ हैं तो वह गलत लिखा भी ठीक कर देंगे। मैंने अपनी जिंदगी में देखा है कि अगर मेरे साथ कभी कुछ बुरा भी हुआ है तो आगे चलकर मुझे उसके अच्छे ही परिणाम मिले हैं। हाल ही में मैंने यूथ नाम की एक फिल्म की है। मुझे उस फिल्म में अपनी कास्टिंग को लेकर बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी, लेकिन पता नहीं कैसे भगवान की कृपा हुई कि मेरे पास वो प्रोजेक्ट आ गया। मैंने उसमें परफॉर्म किया और उसके लिए मुझे बहुत प्यार मिला।

ये हैं प्यार के पैमाने
प्यार को लेकर अपनी प्राथमिकताओं पर प्रियांशी कहती हैं, प्यार को लेकर मेरी प्राथमिकताएं यही हैं कि वो इंसान मेरी तरह धार्मिक स्वभाव वाला, ईमानदार, वफादार, झूठ न बोलने वाला हो। अगर मैं भगवान के बताए सही रास्ते पर जा रही हूं तो कोई रोक-टोक न करे, बल्कि उसमें मेरा साथ दे। इसके साथ थोड़ा मस्ती-मजाक करने वाला व्यक्ति भी होना चाहिए।

काम नहीं कला में संघर्ष
दिल्ली से आने वाली प्रियांशी अपने अभिनय सफर के बारे में बताती हैं, युवावस्था में मेरी मम्मी का सपना अभिनेत्री बनने का था। हालांकि, कुछ पारिवारिक कारणों से वह नहीं बन पाईं। फिर उन्होंने सोचा कि अगर उनकी बेटी हुई तो वह उसे अभिनेत्री बनाएंगी। मॉडलिंग और विज्ञापनों में एक्टिंग तो मैं बचपन से ही करती आई हूं। मेरे सफर में बहुत अलग-अलग तरह के मोड़ आए। धारावाहिक पांड्या स्टोर के आॅडिशन के लिए पहली बार मुंबई आई थी और भगवान की कृपा से उसमें चुन ली गई। तब मुझे कुछ भी उम्मीद नहीं थी। उस समय मैं बहुत अपरिपक्व थी, न मैंने कोई थिएटर किया है, ना ही तब मुझे अच्छी तरह एक्टिंग आती थी। मैं अपने पहले धारावाहिक में काम करते हुए काफी कुछ सीखा। फिर दूसरा धारावाहिक मैंने डोरी किया। उसमें मैंने भावनाओं को गहराई से व्यक्त करना सीखा। अपने सफर में मैंने सिर्फ अपनी कला को बेहतर करने के लिए संघर्ष किया है, बाकी काम पाने को लेकर मैंने कोई संघर्ष नहीं किया है।
मजबूत करनी होगी सोच
समाज में महिलाओं और लड़कियों के समानाधिकार की लड़ाई पर प्रियांशी कहती हैं, आज के दौर में अपना अधिकार पाने के लिए लड़कियों को अपनी आवाज उठाना जरूरी है। मैंने अपनी मम्मी और उनकी जान-पहचान की दूसरी औरतों को भी देखा है कि अगर कोई चीज खराब लगती है तो भी वे अपनी आवाज दबाकर रखती हैं। ऐसी परिस्थितियों में यह बताना बहुत आवश्यक है कि फलां चीज मुझे नहीं पसंद है तो मैं नहीं करूंगी। हम स्वयं को अपने सोच से सशक्त बनाते हैं। इसलिए महिलाओं को अपना सोच मजबूत करना होगा। समाज को यह बताना आवश्यक है कि अपनी जिंदगी के निर्णय लेने के अधिकार हमारे हाथों में हैं। अपने पहले शो में कोई कुछ भी करे, मैं चुप रहती थी। कारण, तब मेरी उम्र सिर्फ 16-17 साल की रही होगी। फिर मैंने असहज करने वाली चीजों पर बोलना शुरू किया। अगर कभी किसी सहकलाकार के साथ कोई समस्या होती थी या किसी सीन में कुछ सुधार करना होता था तो उन चीजों पर बोलना शुरू किया। इससे मुझे इस इंडस्ट्री में अपनी शर्तों पर टिके रहने में बहुत मदद मिली।

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