विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर से नाटक का मंचन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ एवं संस्था विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के उपरांत लखनऊ पब्लिक स्कूल, के प्रेक्षागृह में महेंद्र भीष्म द्वारा लिखित ऐतिहासिक नाटक वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का प्रभावशाली मंचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस अधिकारी डॉ. सत्या सिंह, डॉ. आदर्श गर्ग, महेंद्र भीष्म, प्रदीप सारंग एवं आदर्श गुलसिया द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यशाला का प्रशिक्षण एवं नाटक का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी चंद्रभाष सिंह ने किया। नाटक में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के जीवन, संघर्ष और बलिदान को सशक्त रंगमंचीय प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत किया गया। मंच से जैसे ही रानी लक्ष्मीबाई का प्रसिद्ध उद्घोष मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी गूंजा, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। प्रस्तुति में बालिका मनिकर्णिका के साहसी एवं स्वाभिमानी व्यक्तित्व से लेकर झाँसी की महारानी बनने तथा अंग्रेजी शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध उनके संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। युद्ध दृश्यों, ओजपूर्ण संवादों एवं कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। नाटक में रानी लक्ष्मीबाई के साथ तात्या टोपे, नाना साहेब एवं अन्य क्रांतिकारियों के संघर्ष को भी प्रभावी रूप से मंचित किया गया। प्रस्तुति ने न केवल इतिहास के स्वर्णिम अध्याय को सजीव किया, बल्कि राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान एवं नारी सशक्तिकरण का सशक्त संदेश भी दिया। अंतिम दृश्य में रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान का चित्रण दर्शकों की आंखें नम कर गया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय से प्रभावित होकर उपस्थित दर्शकों ने देर तक तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। नाटक में मलक बुशरा, प्राख्या श्रीवास्तव, श्रेया श्रीवास्तव, अंशिका रस्तोगी, शुभांगी वर्मा, स्मिता तिवारी, प्राची रस्तोगी, राशि रस्तोगी, श्रद्धा कुमारी, देवेंद्र कुमार, शौर्य मिश्रा, जयगणेश कुमार त्रिवेदी, आदर्श गुलसिया, रजत वर्मा, प्रदीप सारंग, यश श्रीवास्तव, मो. अजीज, युग शर्मा, पार्थ पटेल, विनोद कुमार चौधरी, अयांश गुप्ता, अहेम श्रीवास्तव, अनुनय जैन, साद अहमद एवं अभिनव प्रताप सिंह ने विभिन्न भूमिकाओं में सराहनीय अभिनय किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित दर्शकों एवं रंगप्रेमियों ने पूरी टीम को बधाई देते हुए प्रस्तुति को प्रेरणादायी, भावपूर्ण एवं ऐतिहासिक चेतना से ओतप्रोत बताया। 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के आयोजन में बहार सुगम संगीत प्रभाग, बाराबंकी, कमला नारायण ट्रस्ट एवं आँखें फाउंडेशन का विशेष सहयोग रहा।





