ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा
लखनऊ। सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष समय माना गया है। यह महीना साधना, दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा। ज्येष्ठ हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना होता है और इसका संबंध मंगल ग्रह से माना गया है। मान्यता है कि इस महीने की पूर्णिमा तिथि पर ज्येष्ठा नक्षत्र का विशेष संयोग बनता है, जिसके कारण इसे ज्येष्ठ मास कहा जाता है। शास्त्रों में इस अवधि को विशेष रूप से पुण्य अर्जन और आध्यात्मिक कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी बताया गया है।
सूर्य देव से जुड़े उपाय
सरकारी कार्यों में सफलता के लिए घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और ॐ घृणि: सूर्याय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। मानसिक शांति के लिए सूर्य देव को जल अर्पित करते समय गायत्री मंत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। जीवन में सुख-समृद्धि के लिए सूर्य देव का व्रत करें और कनेर के पौधे या उसकी तस्वीर की पूजा करें। मनोकामना पूर्ति के लिए मां दुर्गा के अर्गला स्तोत्र का पाठ करें और नियमित रूप से इसका अभ्यास करें। किसी को आकर्षित करने के लिए लाल कनेर के पौधे का स्मरण करते हुए विशेष मंत्र का 101 बार जाप करें। करियर में पिता के सहयोग के लिए सूर्य देव के सामने खड़े होकर पिता का ध्यान करते हुए मंत्र का जाप करें। घर-परिवार में सुख-शांति के लिए जल में लाल कनेर का फूल डालकर सूर्य देव को अर्पित करें। व्यापार में सफलता के लिए भगवान को मीठी रोटी या पूरी का भोग लगाएं और उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करें। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सूर्य देव को जल अर्पित करें और गुड़ का भोग लगाएं। ऊर्जा और आत्मबल बढ़ाने के लिए ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। दांपत्य जीवन में सम्मान और मधुरता के लिए कनेर के पौधे की तस्वीर पर लाल कपड़ा और मौली अर्पित करें। जीवन में उन्नति के लिए देवी लक्ष्मी को केसर का तिलक लगाकर खीर का भोग अर्पित करें और प्रसाद बांटें।
ज्येष्ठ माह में क्या करें?
इस महीने जल सेवा करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है, जैसे प्याऊ लगवाना, घड़े का दान करना या राहगीरों को शरबत पिलाना। दिन में एक समय भोजन करने की परंपरा अपनाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। सत्तू, तिल, पंखा और छाता जैसी गर्मी से राहत देने वाली वस्तुओं का दान करना भगवान विष्णु को प्रिय माना गया है। सूर्योदय से पहले उठकर वरुण देव का ध्यान करते हुए स्नान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
ज्येष्ठ माह में क्या न करें?
ज्येष्ठ मास में दिन के समय सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे आलस्य, रोग और नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं। बैंगन का सेवन इस अवधि में वर्जित माना गया है, क्योंकि यह शरीर में वात दोष बढ़ा सकता है। जल का अनावश्यक अपव्यय नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे वरुण देव का अपमान माना जाता है और घर की समृद्धि पर असर पड़ सकता है। अधिक मसालेदार, भारी और तामसिक भोजन से बचना चाहिए, ताकि शरीर और पाचन तंत्र स्वस्थ बना रहे।





