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ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगल 5 को , बन रहा दुर्लभ संयोग

लखनऊ। हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है। वैसे तो सनातन धर्म में साल का हर मंगलवार विशेष होता है, लेकिन ज्येष्ठ मास के मंगलवारों की विशेष महत्व है। इस माह के मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से जाना जाता है। साल 2026 में तिथियों के संयोग से ज्येष्ठ माह का अधिकमास लगने के कारण बड़ा मंगल का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि इस बार भक्तों को बजरंगबली की आराधना के लिए अतिरिक्त अवसर मिल रहे हैं। साल 2026 का ज्येष्ठ माह धार्मिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस साल ‘अधिकमास’ ज्येष्ठ माह में पड़ रहा है। इस दुर्लभ संयोग की वजह से इस साल 4 के जगह पर कुल 8 बड़े मंगलवार आएंगे। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगल 5 मई 2026 को पड़ेगा। यह दिन हनुमान भक्तों के लिए विशेष उत्सव का होगा, जहां से भक्ति के इस महापर्व की शुरूआत होगी और 23 जून 2026 तक निरंतर 8 हफ्तों तक बड़े मंगल की धूम रहेगी। साल 2026 में अधिकमास लगने के कारण 8 बड़े मंगलवार का दुर्लभ संयोग बजरंगबली के भक्तों के लिए एक सुनहरा अवसर की तरह है। ऐसे में जितना हो सके इन दिनों व्रत रखें, मंदिर जाएं या घर पर ही भक्ति भाव से पूजा करें। भोग लगाते समय और पाठ करते समय मन में पूरी श्रद्धा रखें। गरीबों को प्रसाद बांटना और दान करना विशेष पुण्यदायी होगा। 5 मई 2026 को ज्येष्ठ माह के पहला बड़ा मंगल है। इस दिन विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करें और इस दिन एकदम सात्विक जीवन अपनाएं।

राम-हनुमान मिलन का साक्षी है ज्येष्ठ मास
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार का आध्यात्मिक महत्व भगवान श्रीराम और हनुमान जी के प्रथम मिलन से जुड़ा है। रामायण काल में, जब प्रभु श्री राम माता सीता की खोज में ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे थे, तब हनुमान जी ने एक ब्राह्मण का रूप धरकर उनसे भेंट की थी। वह पावन दिन ज्येष्ठ मास का मंगलवार ही था। इसी दिन से हनुमान जी का जीवन पूर्णत: राम-काज के लिए समर्पित हो गया, इसीलिए भक्त इस दिन को कृतज्ञता के रूप में मनाते हैं।

क्यों कहा जाता है इसे बुढ़वा मंगल?
‘बड़ा मंगल’ को ‘बुढ़वा मंगल’ कहने के पीछे भी एक रोचक मान्यता है। कहा जाता है कि द्वापर युग में जब भीम को अपनी शक्ति पर अहंकार हो गया था, तब हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धारण कर भीम के घमण्ड को चूर किया था। वह दिन ज्येष्ठ मास का मंगलवार ही था, जब हनुमान जी ने वृद्ध रूप में दर्शन दिए थे।

बड़ा मंगल पूजा विधि और लाभ
इस विशेष दिन पर हनुमान जी को चोला चढ़ाना, सुंदरकांड का पाठ करना और हनुमान चालीसा का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ के मंगल के दिन बजरंगबली अपने पूर्ण स्वरूप में जागृत होते हैं और भक्तों के बड़े से बड़े संकट को क्षण भर में दूर कर देते हैं। लोग इस दिन बेसन के लड्डू या बूंदी का भोग लगाते हैं और राहगीरों को ठंडा पानी या शरबत पिलाकर पुण्य कमाते हैं। ऐसी श्रद्धा है कि इन आठ मंगलवारों के व्रत और पूजन से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।


लखनऊ में बड़े मंगल पर चलेगा स्वच्छता-हरित अभियान
लखनऊ। ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल की परंपरा इस बार नए संदेश के साथ सामने आ रही है। 5 मई से शुरू होने वाले बड़े मंगल पर लगने वाले भंडारों की पहचान सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे प्रदूषण मुक्त, हरित और स्वच्छ बनाने का अभियान भी साथ चलेगा। राजधानी की यही परंपरा उसे देश ही नहीं, दुनिया में अलग पहचान दिलाती है, जहां बड़े मंगल के दिन अधिकांश घरों में भोजन नहीं बनता और लोग भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसी कड़ी में संदीप बंसल ने कहा कि इस बार भंडारों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि ज्येष्ठ के दो महीने होने से कुल आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं। लेकिन संख्या से ज्यादा जरूरी गुणवत्ता और स्वच्छता है। उनका कहना है कि अगर सड़क पर एक भी दोना-पत्तल या प्लास्टिक नजर नहीं आएगा, तभी भंडारा सच्चे अर्थों में सफल माना जाएगा।

भंडारों में श्रमदान करने का फैसला लिया
मंगलमान अभियान के संयोजक प्रो. रामकुमार तिवारी ने भी शहरवासियों से अपील की कि भंडारा सिर्फ सेवा नहीं, जिम्मेदारी भी है। उन्होंने आग्रह किया कि लोग भाव के साथ-साथ सफाई का भी पूरा ध्यान रखें। इस बार कई सामाजिक संगठन भी आगे आए हैं, जिन्होंने भंडारों में श्रमदान करने का फैसला लिया है। आयोजकों से साफ कहा गया है कि वे प्लास्टिक के गिलास, प्लेट और चम्मच का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें। इसके स्थान पर पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाए जाएं, ताकि लखनऊ का यह आयोजन स्वच्छता का भी उदाहरण बन सके।

2 मई को बैठक व मंगल महोत्सव का आयोजन
बंसल ने बताया कि करीब एक हजार भंडारा आयोजकों की सूची तैयार है और 2 मई को एक विशेष बैठक व मंगल महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसमें आयोजकों को सम्मानित करने के साथ प्रशासन के सहयोग की जानकारी भी दी जाएगी।इस पहल को और व्यापक बनाने के लिए स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी और इस पर शोध कार्य भी कराया जाएगा। उद्देश्य साफ है—भंडारा केवल परंपरा न रहकर एक जागरूक सामाजिक अभियान बने, जिससे लखनऊ की पहचान और मजबूत हो।

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