लखनऊ। सावन का महीना बेहद पावन माना जाता है। यह भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान भक्त उनकी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। सावन के सोमवार का व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत का पालन करने से भगवान शिव खुश होते हैं और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। यानी सावन का चौथा व अंतिम सोमवार 4 अगस्त को पड़ेगा, जो बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का पावन संयोग है। चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र और चित्रा नक्षत्र से वृश्चिक राशि पर गोचर करेंगे। इसके साथ ही इस दिन ब्रह्म और इंद्र योग का संयोग भी रहेगा। ऐसे में साधक पूरे दिन कभी भी पूजा कर सकते हैं। हालांकि ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है।
सावन के अंतिम सोमवार को होगा कई शुभ योग
सावन का चौथा और अंतिम सोमवार इस वर्ष 4 अगस्त को पड़ेगा, और यह दिन कई शुभ योगों से युक्त होगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। साथ ही, चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहकर अनुराधा और चित्रा नक्षत्र से संचार करेगा। इसके अतिरिक्त, इस पावन सोमवार को ब्रह्म योग और इंद्र योग जैसे अत्यंत शुभ योग भी बन रहे हैं, जो शिव आराधना को और अधिक फलदायक बनाएंगे।
सावन के अंतिम सोमवार पर मिलेगा भोलेनाथ का आशीर्वाद
सावन के चौथे व अंतिम सोमवार पर रुद्राभिषेक कराना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और ग्रह दोष शांत होते हैं. मान्यता है कि रुद्राभिषेक से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस दिन 108 बेलपत्र लें और प्रत्येक पर सफेद चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखें, फिर उन्हें एक-एक करके शिवलिंग पर अर्पित करें, साथ ही, शमी पत्रों पर शहद लगाकर भोलेनाथ को अर्पित करें। यह उपाय विशेष फलदायी माना जाता है। किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक पूजा करें और फिर जरूरतमंदों को भोजन कराएं. अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अन्न या दक्षिणा का दान करें। ऐसा करने से पुण्य मिलता है और शिव कृपा बनी रहती है।
सावन के आखिरी सोमवार पर करें ये सरल उपाय
रुद्राभिषेक कराएं
भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावशाली उपाय है रुद्राभिषेक। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और जीवन में शुभता लाता है। कहा जाता है कि रुद्राभिषेक से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
चंद्र से जुड़ी वस्तुओं का दान
यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में है, तो आप इस दिन दूध, दही, चावल, चीनी और सफेद वस्त्र जैसे चंद्रमा से संबंधित चीजें दान करें। इससे चंद्रमा की स्थिति बेहतर होगी और मानसिक तनाव से राहत मिलेगी।
108 बेलपत्रों पर लिखें ॐ नम: शिवाय
सफेद चंदन से 108 बेलपत्रों पर ॐ नम: शिवाय लिखें और उन्हें भगवान शिव को अर्पित करें। साथ ही शमी के पत्तों पर शहद लगाकर शिवलिंग पर अर्पण करें। यह उपाय अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
दान करें
किसी शिव मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करें और फिर जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन्हें वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री का दान भी करें। यह पुण्य शिव भक्ति को और भी गहरा करता है।
पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। पूजा शुरू करने से पहले व्रत का संकल्प लें। एक वेदी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। शिवलिंग का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें।
इसके बाद शुद्ध जल से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, चंदन, अक्षत, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफेद फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। माता पार्वती को सोलह शृंगार की सामग्री चढ़ाएं। घी का दीपक और धूप जलाएं। ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। सावन सोमवार व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। भगवान को सात्विक भोग लगाएं और उसे प्रसाद के रूप में बांटें। पूजा में हुई भूल के लिए भगवान शिव से क्षमा-प्रार्थना करें।
शिवालय सजधज कर तैयार, शिवजी का होगा विशेष शृंगार
लखनऊ। सावन माह के चौथे व अंतिम सोमवार को लेकर राजधानी के सभी शिव मंदिरों में तैयारी पूरी हो गई हैं। देर रात से ही मंदिर रोशनी से जगमगा उठे। श्रद्धालुओं की कतार भी रात से लग गई। राजेन्द्रनगर स्थित महाकाल मंदिर में रात 12 बजे कपाट खुल जाएंगे। इस मौके पर राजधानी में कहीं भस्म आरती तो कहीं जलाभिषेक के साथ विशेष शृंगार किया जायेगा। वहीं महाकाल मंदिर में उज्जैन स्थित महाकाल की तर्ज पर भस्म आरती होगी। आरती के बाद भक्त जल व दुग्धाभिषेक कर सकेंगे।
चौक स्थित कोतवालेश्वर मंदिर में रोज की तरह जलाभिषेक से पूजन की शुरूआत होगी। बाबा का फल फूल और मेवे से श्रृंगार होगा। सुबह और शाम भोलेनाथ की भव्य आरती होगी। उधर, सदर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग के कपाट सुबह पांच बजे खुल जाएंगे। भोलेनाथ का भव्य श्रृंगार होगा। भक्त भोलेनाथ, मां पार्वती और गणेश जी के एक साथ दर्शन कर सकेंगे।
डालीगंज स्थित मनकामेश्वर मंदिर में देर रात से ही भक्तों की भीड़ जुटने लगी। 51 लीटर दुग्ध से भोलेनाथ का अभिषेक होगा। भोर में चार बजे भोलेनाथ की आरती के साथ मंदिर के कपाट खुलेंगे। भोलेनाथ नग जणित पगड़ी पहन कर दर्शन देंगे। भक्त, जल, दुग्ध, बेलपत्र, धतूरा अर्पित कर भोलेनाथ का पूजन करेंगे।
यहां भी होंगे आयोजन:
चौपटिया स्थित प्राचीन बड़ा शिवाला में सावन के चौथे व अंतिम सोमवार पर भी भोलेनाथ का फूलों से शृंगार होगा। तथा आचार्यो द्वारा रुद्राभिषेक का आयोजन किया जायेगा। नादान महल रोड पर स्थित सिद्धनाथ मन्दिर सजावट व भोलेनाथ का श्रंगार देखने वाला होता है। प्राचीनकाल से चला आ रहा यहां का रुद्राभिषेक प्रसिद्ध है। प्रत्येक सोमवार को करीब 50 लीटर दुध से भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे। चौक स्थित कोनेश्वर महादेव मन्दिर में कई कुंटल फूलों से भोलेनाथ का शृंगार और रुद्राभिषेक होगा। आगामीढ़ ढ्योढ़ी सुभाष मार्ग स्थित महामंगलेश्वर महादेव मन्दिर सावन के चौथे सोमवार को फूलों व फलों से मन्दिर को सजाया जाएगा। मोहान रोड स्थित बुद्धेश्वर महादेव मन्दिर में पूरे सावन भर तथा सावन के बुधवार को यहां मेला लगेगा। खदरा के आशुतोष शिव मन्दिर के महंत सुरेन्द्र दास ने बताया कि सावन के सभी सोमवार को ओम नम: शिवाय का संगीतमय पाठ होगा।





