संभल। ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संभल में अपनी ‘गौ धर्म यात्रा’ के दौरान पत्रकारों से बातचीत में अयोध्या राम मंदिर दान घोटाले की प्राथमिकी (एफआईआर) पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में केवल नोट गिनने वाले छोटे कर्मचारियों को मोहरा बनाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि असल बड़ी हेराफेरी करने वाले प्रभावशाली और बड़े जिम्मेदार लोगों को पूरी तरह बचा लिया गया है।
शंकराचार्य ने कहा कि राम मंदिर मामले में शुरुआत से ही वेदों, शास्त्रों और धार्मिक गुरुओं की अनदेखी कर मनमाने फैसले लिए गए और ट्रस्ट में संतों-पुजारियों को दूर रखकर राजनीतिक नेताओं के चहेतों को जगह दी गई। उन्होंने तंज कसा कि यदि मंशा साफ होती तो ट्रस्ट की कमान चारों शंकराचार्यों और रामानंदाचार्य जैसे शीर्ष गुरुओं को सौंपी जाती। इसके साथ ही उन्होंने जांच के बाद दर्ज हुई इस प्राथमिकी के हवाले से विपक्ष के आरोपों को सही ठहराया और कहा कि गड़बड़ी थी, तभी जांच के बाद यह कदम उठाया गया।
भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पार्टी के हिंदुत्व को ‘नकली’ और उसके सदस्यों को ‘नकली हिंदू’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जो लोग वेदों, धर्मग्रंथों और अपने गुरुओं की आज्ञा को नहीं मानते, वे असली हिंदू नहीं हो सकते। उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों पर बात करते हुए उन्होंने संभल की कल्कि नगरी में प्राचीन तीर्थ स्थलों के पुनरुद्धार की सराहना की, लेकिन साथ ही वाराणसी में विकास के नाम पर प्राचीन मंदिरों को तोड़े जाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इतिहास सरकार के इस कदम को कभी सही नहीं मानेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ३ मई से गोरखपुर से शुरू हुई उनकी यह ‘गौ धर्म यात्रा’ करीब 170 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, जिसका एकमात्र उद्देश्य 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को जागरूक करना है ताकि वे केवल उन्हीं उम्मीदवारों का समर्थन करें जो गाय को ‘राजमाता’ घोषित करने और गौ-संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हों।





