हर दिन भयावह हो रहे संक्रमण के आंकड़ों के बीच धीरे-धीरे उम्मीद की कुछ किरणें भी नजर आने लगी हैं। चीन में जब कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने लगा और पूरी दुनिया में इक्का-दुक्का संक्रमण के मामले सामने आने लगे थे, तभी से पश्चिमी देशों के रिसर्च इंस्टीट्यूट सतर्क हो गये थे और उन्होंने अनुसंधान शुरू कर दिया था।
भारत में वैक्सीन के विकास की प्रक्रिया करीब एक-डेढ़ माह देर से शुरू हुई, लेकिन पीएम की अगुवाई में जिस तरह नियोजित प्रयास हुए उसके कारण वैक्सीन के विकास की रेस में भारत सबसे आगे नहीं तो किसी से पीछे भी नहीं है। भारत अगर वैक्सीन का विकास कर लेता है तो इसके निर्माण का सबसे ज्यादा अनुभव भारत को ही है। इसलिए वैक्सीन का विकास चाहे जिस देश में हो लेकिन उसका निर्माण भारत में भी होगा।
वैक्सीन के विकास की पहली उम्मीद जिस ऑक्सफोर्ड एवं मॉडर्ना से बनी थी उनका भी वैक्सीन उत्पादन का समझौता भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनियों के साथ है। इसलिए पहले लॉचिंग चाहे जिस देश की तरफ से की जाये लेकिन इसकी संभावना अधिक है कि उसका उत्पादन भारत में भी होगा। इंग्लैंड, अमरीका, कनाडा जैसे देशों के डाटा चोरी के आरोपों के बीच रूस ने वैक्सीन लॉचिंग की तारीख का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
रूस ने 12 से 14 अगस्त के बीच चार करोड़ खुराक के साथ वैक्सीन लांच करेगा। इसमें करीब आधी वैक्सीनों का उत्पादन वह खुद और आधी का विदेशों से करायेगा। कोरोना वैक्सीन के 140 प्रोजेक्ट दुनिया भर में चल रहे हैं जिसमें से 23 मानव परीक्षण के चरण में और आठ तो बहुत एडवांस दौर में हैं। आॅक्सफोर्ड, मॉडर्ना, एस्ट्रा जेनेका, कैनसिनो, साइनों फार्मा जैसे संस्थानों के प्रोजेक्ट एडवांस दौर में हैं।
भारत में आयुर्वेद के जरिए मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र विकसित करने के ठोस प्रयासों और इसके सुखद परिणामों के बीच आयुर्वेदिक दवाओं पर क्लीनिकल ट्रायल के साथ ही वैक्सीन विकास के लिए भी आधा दर्जन संस्थानों के दो साझा प्रोजेक्ट को ह्यूमन ट्रालय की अनुमति मिल गयी है। वैक्सीन के विकास पर तेजी से आगे बढ़ते हुए आईसीएमआर, नेशनल वायरोलॉजी और भारत वायोटेक के प्रोजेक्ट का ट्रायल पीजीआई रोहतक, गोरखपुर, कानपुर, हैदराबाद, विशाखा पट्टनम, पटना, भुवनेश्वर, चेन्नई और गोवा सहित 14 शहरों के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में ट्रायल शुरू हो चुका है।
14 संस्थानों में से पटना एम्स और रोहतक पीजीआई में प्रथम चरण का सेफ्टी एवं स्क्रीनिंग ट्रायल शुरू हुआ और जिन वॉलंटियर्स को वैक्सीन दी गयी उनमें किसी तरह का साइडइफेक्ट देखने को नहीं मिला। स्पष्ट है सबसे महत्वपूर्ण चरण में अच्छे संकेत मिले हैं और सब कुछ इस तरह आगे बढ़ता रहा तो अगस्त में न सही अक्टूबर मध्य तक लॉचिंग हो सकती है और अगले दो महीने में प्रतिरक्षण अभियान भी शुरू हो सकता है।
भारत अगर वैक्सीन बनाने में सफल होता है तो बहुत बड़े गौरव एवं जनस्वास्थ्य की दिशा में ऐतिहासिक होगा लेकिन वैक्सीन का निर्माण चाहे जो देश करें, अभी यह प्रयास शुरू हो गये हैं कि इसकी उपलब्धता सभी देशों को समान रूप से होनी चाहिए। मानवता के कल्याण के लिए यही उपयुक्त भी होगा।





