प्रदेश के प्रेक्षागृहों की बदहाली पर कलाकारों का फूटा गुस्सा, समाधान न हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन
लखनऊ। प्रदेश के प्रमुख प्रेक्षागृहों की बदहाल स्थिति, बढ़ते किराए और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कलाकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में प्रेस वार्ता आयोजित कर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रेस वार्ता में पद्मश्री अनिल रस्तोगी, वरिष्ठ रंगकर्मी विनोद मिश्रा, सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, राजा अवस्थी, गोपाल सिन्हा, अजय द्विवेदी, रंगकर्मी मुकेश वर्मा, राजीव रंजन सहित सैकड़ों कलाकार उपस्थित रहे। इस दौरान कलाकारों ने प्रदेश के सांस्कृतिक केंद्रों की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष संगम बहुगुणा ने कहा कि संत गाडगे प्रेक्षागृह में केवल एसी और पर्दों की व्यवस्था को दुरुस्त करने की आवश्यकता है, लेकिन इसके बावजूद इसे लंबे समय से बंद रखा गया है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक निर्माण कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बजाय आवश्यक मरम्मत कर इसे जून माह में ही कलाकारों के लिए खोल दिया जाना चाहिए। इससे सरकारी धन की बचत होगी और सांस्कृतिक गतिविधियां भी प्रभावित नहीं होंगी।
पद्मश्री अनिल रस्तोगी ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों और प्रेक्षागृहों की उपेक्षा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती हैं और इन्हें संरक्षित करना सरकार तथा समाज दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कलाकारों से संवाद किए बिना लिए जा रहे फैसले व्यावहारिक नहीं हैं और इससे सांस्कृतिक गतिविधियों को नुकसान पहुंच रहा है। वरिष्ठ रंगकर्मी विनोद मिश्रा ने कहा कि बढ़ते किराए और घटती सुविधाओं ने रंगमंच से जुड़े छोटे समूहों और युवा कलाकारों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रेक्षागृहों का उद्देश्य संस्कृति को बढ़ावा देना है, न कि उन्हें केवल राजस्व का साधन बनाना। सरकार को कलाकारों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और किराए को यथासंभव कम करना चाहिए। सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ ने कहा कि प्रेक्षागृह केवल भवन नहीं बल्कि सांस्कृतिक चेतना और रचनात्मक अभिव्यक्ति के केंद्र होते हैं। उन्होंने कहा कि कई प्रेक्षागृहों में प्रकाश और ध्वनि व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है, जिससे कार्यक्रमों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने सांस्कृतिक संस्थानों के संचालन और निर्णय प्रक्रिया में कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। प्रेस वार्ता में वाल्मीकि प्रेक्षागृह का निर्माण छह माह में पूरा करने, राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह का किराया कम करने तथा कला मंडपम में प्रकाश और ध्वनि व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की मांग उठाई गई। कलाकारों ने भारतेंदु नाट्य अकादमी के राज बिसारिया और बी.एम. शाह आॅडिटोरियम को बाहरी कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए भी सुलभ बनाने की मांग की। संगम बहुगुणा ने घोषणा की कि शीघ्र ही वरिष्ठ कलाकारों की एक निगरानी समिति गठित की जाएगी, जो प्रदेश के प्रेक्षागृहों की स्थिति का नियमित निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और संस्कृति मंत्रालय को भेजेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कलाकारों की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर के कलाकारों को साथ लेकर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।





