लखनऊ। राष्ट्रीय कवि संगम, लखनऊ इकाई (अवध प्रांत) की ओर से कवि कमलेश मौर्य मृदु की मंचीय संस्मरणों पर आधारित पुस्तक मंच के प्रपंच का विमोचन शनिवार को हुआ। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में हुए समारोह की अध्यक्षता प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने की। प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि संस्मरण जब निजी अनुभवों से आगे बढ़कर अपने समय के साहित्यिक परिवेश का साक्ष्य बनते हैं, तब वे महत्त्वपूर्ण दस्तावेज का रूप ग्रहण करते हैं। मंच के प्रपंच मंचीय जीवन और हिंदी की सार्वजनिक साहित्यिक संस्कृति का जीवंत आख्यान है। मुख्य अतिथि राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र ने कहा कि साहित्य और कला समाज की संवेदना को समृद्ध करते हैं और यह कृति मंचीय अनुभवों को स्थायी साहित्यिक स्मृति प्रदान करती है। शिवकुमार व्यास ने कहा कि लेखक ने निजी अनुभवों को व्यापक साहित्यिक संदर्भ प्रदान किया है, जबकि डॉ. दिनेश चंद्र अवस्थी ने इसे मंचीय जीवन की विविध परतों को उद्घाटित करने वाली कृति बताया। मुख्य वक्ता आचार्य ओम नीरव ने कहा कि कवि-सम्मेलन केवल कविता-पाठ का मंच नहीं, बल्कि कवि और समाज के बीच जीवंत संवाद का माध्यम है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार पद्मकांत शर्मा, उतर क्षेत्र एनसीजेडसी उत्तर क्षेत्र के पूर्व निदेशक डा सौभाग्य वर्धन,डा प्रेमलता त्रिपाठी, डॉ. अशोक अग्निपथी, कृष्ण कुमार मौर्य समेत अन्य मौजूद रहे।





