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इस महीने दो बार रखा जायेगा रवि प्रदोष व्रत, बन रहा दुर्लभ संयोग

लखनऊ। हिंदू धर्म में भगवान शिव की साधना के लिए प्रदोष व्रत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है. मान्यता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और नियम के साथ प्रदोष काल में महादेव की आराधना करते हैं, उनके जीवन के सभी संकट और दुख-दरिद्र पल भर में दूर हो जाते हैं. आमतौर पर हर महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं, लेकिन इस बार जुलाई का महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास और सौभाग्य लेकर आ रहा है. इस महीने एक बहुत ही दुर्लभ और पावन संयोग बन रहा है. जुलाई के महीने में दोनों ही प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ रहे हैं, जिसके कारण एक ही महीने में दो रवि प्रदोष व्रत का महासंयोग देखने को मिलेगा। जब प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे रवि प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत शिव जी के साथ-साथ सूर्य देव की कृपा पाने के लिए भी अचूक माना जाता है।

पहला रवि प्रदोष व्रत कब है?
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 12 जुलाई 2026 को सुबह 2 बजकर 04 मिनट पर होगा और इसका समापन उसी दिन रात 10 बजकर 29 मिनट पर होगा. इसलिए पहला रवि प्रदोष व्रत 12 जुलाई 2026, रविवार को रखा जाएगा. इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 7 बजकर 22 मिनट से रात 9 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. मान्यता है कि इसी समय विधि-विधान से शिव पूजन और अभिषेक करने से विशेष फल की मिलता है।

दूसरा रवि प्रदोष व्रत कब पड़ेगा?
जुलाई का दूसरा रवि प्रदोष व्रत 26 जुलाई 2026, रविवार को पड़ेगा. यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी का प्रदोष व्रत होगा. इस दिन प्रदोष काल शाम 7 बजकर 16 मिनट से रात 9 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ समय में भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
रवि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन सात्विक जीवनशैली अपनाएं. प्रदोष काल में भगवान शिव के शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और फल अर्पित करें. पूजा के दौरान ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करें. आखिर में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और अपनी मनोकामना उनके चरणों में अर्पित करें।

जुलाई का यह संयोग क्यों माना जा रहा है खास?
आमतौर पर हर महीने प्रदोष व्रत दो बार आता है, लेकिन रविवार के दिन पड़ने वाला रवि प्रदोष व्रत हर बार नहीं बनता. जुलाई 2026 में संयोग ऐसा बन रहा है कि महीने के दोनों प्रदोष व्रत रविवार को पड़ रहे हैं. यही वजह है कि श्रद्धालुओं को एक ही महीने में दो बार रवि प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव व सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

रवि प्रदोष व्रत का महत्व
रवि प्रदोष व्रत भगवान शिव और सूर्य देव दोनों की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और सच्चे मन से पूजा करने से पापों का नाश होता है, ग्रह दोष शांत होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर हो या मान-सम्मान, स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी परेशानियां हों, उनके लिए भी यह व्रत शुभ माना जाता है।

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