पूर्वी लद्दाख के विवादित क्षेत्रों में घुसपैठ कर चीन मिलिट्री जमावड़ा और सैन्य गतिविधियों के लिए स्थायी निर्माण कर रहा है। इससे स्पष्ट है कि चीन इस क्षेत्र को आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। चीन अवैध घुसपैठ करने के बाद भी लगातार ढिठाई कर रहा है। बातचीत के नाम पर समय निकाल रहा है और चार किलो मीटर अंदर घुसकर दो किलोमीटर पीछे हटने के अपने पुराने टैक्टिस को दोहरा रहा है।
ऐसे में सैन्य एवं कूटनीतिक वार्ता के बाद भी अगर चीन पीछे नहीं हटता है, तो भारत के पास सैन्य दमखम से चीन को पीछे खदेड़ने के अलावा और विकल्प नहीं है। लद्दाख में चीनी घुसपैठ के चार महीने बाद इसी तथ्य को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने रखा है। चीन अपै्रल के आखिर में ही पूर्वी लद्दाख के फिंगर एरिया, गोगरा, हॉट स्प्रिंग और पैंगोंग त्सो लेक के विवादित क्षेत्रों में घुस आया है।
भारत और चीन के बीच सीमा पर शांति बनाये रखने के लिए 1993, 1996, 2005, 2012, 2013 में समझौते हो चुके हैं। इन समझौतों के तहत दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी थी कि जब तक सीमा विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो जाता है तब तक विवादित क्षेत्रों से दोनों देशों की सेनाएं दूर रहेंगी। लेकिन चीन बार-बार घुसपैठ करता है। वह विवादित क्षेत्रों में घुस आता है जब विरोध होता है या दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए जो मैकेनिज्म बना है उसकी बैठक होती है तो थोड़ा पीछे हट जाता है और कुछ हिस्सा दबा लेता है।
चार कदम आगे, दो कदम पीछे की शातिर चाल से चीन ने बिना युद्ध के ही एलएसी पर हजारों किलो मीटर एरिया हड़प लिया। 1962 की युद्ध में भी चीन ने करीब 40 हजार किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। साफ है कि भारत की जमीन पर चीन की बुरी नजर है। इसीलिए चीन जान-बूझकर सीमा पर समझौता नहीं करता है। क्योंकि अगर दोनों देशों की सीमा स्पष्ट हो जायेगी तो चीन घुसपैठ नहीं कर सकेगा।
जमीन हड़पने के लिए बार-बार चीन अंदर घुस आता है और भारतीय नेतृत्व कूटनीतिक वार्ता के जरिये वापस करने की बात करता है। कूटनीतिक समाधान का रास्ता उन देशों के साथ बेहतर विकल्प होता है जहां लोकतंत्र एवं मानव जीवन का सम्मान हो। चीन जैसा बदमाश देश शांति की भाषा समझता ही नहीं।
चीन ने भारत की सीमा में घुसपैठ की है और बातचीत का नाटक करता है, लेकिन वापस नहीं जा रहा है। इसलिए बहुत ज्यादा बातचीत देश की कमजोरी को प्रकट करता है। भले ही हमारा नेतृत्व ‘एक इंच जमीन नहीं छोड़ेंगे, दुश्मन आंख उठाकर नहीं देख सकता,’ जैसे खोखले ढींग भरता रहे।
दरअसल चीन को वापस होने की चेतावनी देकर भारत को चुपचाप सैन्य तैयारी करनी चाहिए। जब देश को लगे कि वह एक बेहतर स्थिति में है तब चीन पर हमला करके जमीन छुड़ायी जाये। युद्ध करके अगर चीन को खदेड़ा जायेगा तो वह दुबारा फिर नहीं आयेगा। शांति वार्ता, चिरौरी और गिड़गिड़ाने से पीछे हटेगा तो कुछ दिन बाद फिर घुसपैठ करेगा। इसलिए चीन के साथ इज्जत गंवाने के बजाय कठोरता से पेश आना चाहिए। सीडीएस ने ऐसा ही संकेत दिया है।





