लखनऊ। राजधानी में शुक्रवार को शहर के सभी गुरुद्वारों में गुरु हरकिशन साहिा जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में आज शाम 7 बजे से 11 बजे तक गुरु हरकिशन साहिब जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा एवं उल्लास पूर्वक मनाया गया। गुरुद्वारा सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि डॉक्टर गुरमीत सिंह के संयोजन में इस अवसर पर विशेष रूप से रुद्रपुर से आए भाई गुरविंदर सिंह जी ने शबद कीर्तन द्वारा सगंतो को निहाल किया। हेड ग्रंथी ज्ञानी परमजीत सिंह जी ने श्री गुरु हरकिशन साहब जी के जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की समाप्ति पर मिष्ठान प्रसाद एवं गुरु का अटूट लंगर वितरित हुआ।
वहीं गुरुद्वारा सदर में सिखों के आठवें गुरु साहिब श्री गुरु हर किशन साहिब जी का 370वाँ प्रकाश पर्व आज गुरुद्वारा सदर, लखनऊ में श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगत ने गुरु घर में मत्था टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा कीर्तन, कथा एवं अरदास में सहभागी बनकर गुरु साहिब के जीवन एवं शिक्षाओं का स्मरण किया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री अखंड पाठ साहिब के भोग एवं अरदास के साथ हुआ। गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी हरविंदर सिंह जी ने गुरु हर किशन साहिब जी के जीवन, उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व तथा सेवा, करुणा एवं विनम्रता के संदेश पर आधारित प्रेरणादायी कथा सुनाकर संगत को निहाल किया। उन्होंने कहा कि गुरु हर किशन साहिब जी ने अल्पायु में ही संपूर्ण मानवता को निस्वार्थ सेवा, दया और परोपकार का अमूल्य संदेश दिया। इसके उपरांत भाई गुरविंदर सिंह जी एवं उनके सहयोगी रागी जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को आध्यात्मिक आनंद से विभोर कर दिया। संपूर्ण दीवान के दौरान संगत गुरु की वाणी के रस में सराबोर रही।
इस अवसर पर गुरुद्वारा सदर के अध्यक्ष सरदार हरपाल सिंह जग्गी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि साहिब श्री गुरु हर किशन साहिब जी का जन्म 7 जुलाई 1656 को किरतपुर साहिब में हुआ था। मात्र पाँच वर्ष की आयु में उन्हें गुरुगद्दी प्राप्त हुई। इतनी अल्प आयु में भी वे गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं, आध्यात्मिक ज्ञान, करुणा, विनम्रता और सेवा भावना से पूर्ण थे।
उन्होंने कहा कि जब गुरु हर किशन साहिब जी दिल्ली पधारे, उस समय वहाँ चेचक एवं अन्य संक्रामक महामारी का भीषण प्रकोप था। गुरु साहिब ने बिना किसी जाति, धर्म, वर्ग अथवा संप्रदाय का भेदभाव किए रोगियों की सेवा की, उन्हें सांत्वना दी और मानवता की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। सेवा करते हुए वे स्वयं भी चेचक की चपेट में आ गए और 30 मार्च 1664 को मात्र आठ वर्ष की आयु में जोति जोत समा गए। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, सेवा, करुणा एवं मानव कल्याण का अमर संदेश है।
सरदार हरपाल सिंह जग्गी ने कहा कि आज का युग स्वार्थ और भौतिकवाद का युग माना जाता है, ऐसे समय में गुरु हर किशन साहिब जी का जीवन हमें मानव सेवा, प्रेम, भाईचारे, समानता, सहिष्णुता और विनम्रता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का मूल उद्देश्य मानवता की सेवा और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा नैतिक मूल्यों की स्थापना करना है। गुरु साहिब का जीवन इस सत्य का सर्वोत्तम उदाहरण है कि सच्ची ईश्वर भक्ति मानव सेवा में ही निहित है।
उन्होंने संगत से आह्वान किया कि गुरु साहिब के आदर्शों को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में आत्मसात करते हुए गरीब, असहाय, बीमार एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा को अपना नैतिक एवं सामाजिक दायित्व बनाएं। यही गुरु हर किशन साहिब जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर सरदार नरेंद्र सिंह छाबड़ा एवं सरदार सुरेंद्र सिंह ‘गोलू’ वरिष्ठ सदस्यों के रूप में विशेष रूप से उपस्थित रहे तथा उन्होंने आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं एवं सेवा कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी, सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में संगत ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
समारोह का समापन सामूहिक अरदास के साथ हुआ, जिसके उपरांत समस्त संगत ने गुरु का अटूट लंगर ग्रहण किया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सेवादारों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।





