लखनऊ। आशियाना में चल रहे चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत जैन आचार्य श्री मानतुंगाचार्य विरचित श्री भक्ताम्बर स्तोत्र के 48 गाथाओं के व्याख्यान की श्रृंखला निरंतर जारी है। इसी क्रम में उपाध्याय श्री 108 वीहसंत सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अच्छे एवं बुरे कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। संसार में जो भी कर्म किए जाते हैं, उनका परिणाम निश्चित रूप से सामने आता है। जो बोया जाता है, वही काटना पड़ता है। उपाध्याय श्री ने कहा कि पूर्व में किए गए कर्म हमारे द्वारा पहले से अर्जित धन के समान हैं, जिसे हम वर्तमान में खर्च कर रहे हैं। यदि आज हम सत्कर्मों, सेवा, दया और परोपकार के माध्यम से पुण्य का संचय नहीं करेंगे, तो भविष्य में कष्टों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भले ही किसी कारणवश एक दिन मंदिर न जा सकें, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम एक जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति की सहायता करने का नियम अवश्य लेना चाहिए। यही सच्चा धर्म और मानवता की सेवा है। समिति के कार्याध्यक्ष आदीश जैन ने बताया कि आगामी 9 अगस्त 2026 को राष्ट्रहित पर विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम राजलक्ष्मी स्वीट हाउस, आशियाना चौराहा, एलडीए कॉलोनी, कानपुर रोड, लखनऊ में आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में चार्टर्ड अकाउंटेंट, चिकित्सक, अधिवक्ता, प्रोफेसर, अभियंता, सरकारी अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले जैन समाज के विशिष्ट व्यक्तित्वों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रहित विषय पर विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन होगा, जिसमें इस बात पर मंथन किया जाएगा कि राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक विकास में जैन समाज किस प्रकार और अधिक प्रभावी योगदान दे सकता है। कार्यक्रम में जैन समाज के सभी प्रबुद्धजनों से उपस्थित होकर अपने विचार रखने का आह्वान किया गया है।





