लखनऊ। सावन शिवरात्रि का हिंदू धर्म में बेहद खास स्थान है। यह पर्व श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि पूरा सावन महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन की गई पूजा, व्रत, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसी कारण इस अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की बड़ी संख्या देखने को मिलती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करते हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ की गई शिव भक्ति से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही भक्तों की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन शिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी और 12 अगस्त को रात 1 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। चूंकि शिवरात्रि में रात्रि पूजन का विशेष महत्व होता है, इसलिए 11 अगस्त को ही यह पर्व मनाना अधिक उचित माना जाएगा। इस दिन रात्रि के चारों प्रहर में भगवान शिव की पूजा करने का विधान है।
चार प्रहर की पूजा का समय
प्रथम प्रहर की पूजा- शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक
द्वितीय प्रहर की पूजा- रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
तृतीय प्रहर की पूजा- रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक
इन चारों समयों में श्रद्धा के साथ पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व
सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की उपासना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत रखने, रात्रि जागरण करने और ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करने से पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है। साथ ही आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी खुलता है। अविवाहित युवक-युवतियां इस दिन मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित लोग अपने वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और दीघार्यु के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं।
शिव पूजन विधि
सबसे पहले पानी में गंगाजल में डालकर स्नान करें। शिव मंदिर जाकर या घर पर ही शिव जी की विधिवत पूजा करें। शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल चढ़ाएं। पंचामृत से अभिषेक करें। वस्त्र अर्पित करें और त्रिपुंड लगाएं। भगवान शिव को सफेद फूल, धतूरा, भांग और विशेष रूप से बिल्वपत्र अर्पित करें। बिल्वपत्र अर्पित करते समय ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करें। देसी घी का दीपक जलाएं। आखिरी में भाव के साथ आरती करें।





