मनोरंज चित्रकार के मार्गदर्शन में संपन्न हुई बंगाल कालीघाट पटचित्र कार्यशाला
लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित कोकोरो आर्ट गैलरी में आयोजित दो दिवसीय बंगाल कालीघाट पटचित्र कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला का संचालन पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जनपद के सुप्रसिद्ध लोकचित्रकार मनोरंज चित्रकार के मार्गदर्शन में किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को बंगाल की समृद्ध कालीघाट पटचित्र परंपरा से परिचित कराना तथा उन्हें इस विशिष्ट लोकचित्र शैली का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कलाकार जय कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे आयोजन न केवल पारंपरिक कलाओं के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करते हैं, बल्कि कलाकारों और समाज के बीच सांस्कृतिक संवाद को भी सशक्त बनाते हैं। उन्होंने लोककलाओं को भारत की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को कालीघाट चित्रकला के इतिहास, विकास, विषयवस्तु, रेखांकन, रंग-योजना तथा पारंपरिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। मनोरंज चित्रकार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कालीघाट पटचित्र केवल एक चित्रशैली नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक स्मृति, लोकविश्वास और जनजीवन की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने प्रतिभागियों को पारंपरिक शैली में चित्र निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया तथा लोककला की संवेदनात्मक और सांस्कृतिक विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला में लखनऊ और अयोध्या के कला विद्यार्थियों, युवा कलाकारों, शोधार्थियों एवं कला प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों में आंचल यादव, प्रियंका सैगल, सैयद फैजान अली, मुस्कान सिंह, पार्थ प्रजापति, अंजली मौर्य, नेहा, रुद्रेंदु, सृष्टि तिवारी, अदिति सिंघल, तुलिका पुष्कर, गीतिका, निवेदिता कृष्णन, प्रांजलि शर्मा, भ्रामी प्रजापति, अभिलाष प्रजापति, गीतिका मटाह, नीता जोशी, वर्षा यादव, स्तुति सिंह, प्रवीण कुमार यादव, हरनिमरत कौर बग्गा, श्रेनिल ओसवाल, दिव्याना बडेर, हृदान डागरिया एवं दिव्यकुश पांडेय शामिल रहे। समापन अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा निर्मित कालीघाट पटचित्रों का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें उनकी सृजनात्मकता, सौंदर्यबोध और कार्यशाला के दौरान अर्जित कौशल की प्रभावशाली झलक देखने को मिली। प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें भारतीय लोककला की परंपराओं को निकट से समझने, उनके सांस्कृतिक संदर्भों को जानने तथा पारंपरिक कलाभाषा में कार्य करने की प्रेरणा प्राप्त हुई। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर कोकोरो आर्ट गैलरी की क्यूरेटर वंदना सहगल ने कहा कि गैलरी भविष्य में भी समकालीन कला के साथ-साथ भारतीय लोक एवं जनजातीय कला पर केंद्रित प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करती रहेगी, जिससे कलाकारों और कला-प्रेमियों को भारतीय कला की विविध परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो सके। कार्यक्रम में नवनीत सहगल,भूपेंद्र कुमार अस्थाना, विनय पॉल, गिरीश पांडेय, राबिया, जुबैरिया, अजय कुमार, हंसराज सहित अनेक कलाकार, कला-प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।





