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रोको ना डगर मेरो श्याम… पर कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुति

ग्रीष्मकालीन कथक नृत्य कार्यशाला का भव्य समापन
लखनऊ। बिरजू महाराज कथक संस्थान, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन की स्वायत्तशासी संस्था द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन कथक नृत्य कार्यशाला का भव्य समापन समारोह भातखंडे में संपन्न हुआ। संस्थान विगत कई वर्षों से कथक एवं भारतीय शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण, संवर्धन तथा प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। संस्थान में कथक नृत्य, तबला, शास्त्रीय गायन एवं हारमोनियम की शिक्षा अभिरुचि पाठ्यक्रमों से लेकर डिप्लोमा एवं बी.पी.ए. स्तर तक प्रदान की जाती है। इस कार्यशाला की विशेषता यह रही कि इसमें पाँच वर्ष की आयु के नन्हे बच्चों से लेकर लगभग पचहत्तर वर्ष तक के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समापन समारोह में कुल 78 विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर बिरजू महाराज कथक संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर, उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी तथा मुख्य अतिथि सुमोना एस पाण्डेय, कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी लखनऊ भी उपस्थित रहीं। इसके उपरांत भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित हनुमान अष्टकम की प्रस्तुति के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारम्भ हुआ। तदोपरान्त वरिष्ठ विद्यार्थियों द्वारा धमार ताल (14 मात्रा) में शुद्ध एवं पारंपरिक कथक शैली की प्रस्तुति दी गई, जिसने कथक की शास्त्रीय गरिमा एवं सौंदर्य को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।
इसके बाद नवांकुर कलाकारों द्वारा तीनताल की प्रस्तुति दी गई। इस प्रस्तुति की विशेषता यह रही कि चार-पाँच वर्ष के नन्हे बच्चों से लेकर वरिष्ठ आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने एक साथ मंच साझा किया। कार्यक्रम में आगे बाल कलाकारों द्वारा राधा-कृष्ण भाव पर आधारित सुप्रसिद्ध दादरा रोको ना डगर मेरो श्याम प्रस्तुत किया गया, जिसमें उनकी सहज अभिव्यक्ति एवं भाव-सौंदर्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। समापन प्रस्तुति के रूप में भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित एक भव्य नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई। इसमें सीता-राम के अटूट प्रेम, शूर्पणखा प्रसंग, मारीच वध, सीता हरण, वनवास तथा अयोध्या में श्रीराम की विजय एवं गौरवपूर्ण वापसी का प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति, आदर्शों एवं मयार्दा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन मूल्यों का सुंदर कलात्मक चित्रण किया। संपूर्ण कार्यक्रम में संगीत पक्ष में संस्थान के प्रशिक्षकों का विशेष योगदान रहा। तबला संगत एवं संगीत संयोजन श्री आनंद दीक्षित द्वारा किया गया। सिंथेसाइजर एवं गायन में श्री कृष्ण मौर्य ने सहयोग प्रदान किया। सुश्री मीना वर्मा ने स्वर-संगत दी तथा ढोलक एवं साइड रिदम पर श्री नीतीश भारती ने प्रभावी भूमिका निभाई। कार्यक्रम की पढ़ंत एवं नृत्य निर्देशन डॉ. उपासना दीक्षित द्वारा किया गया, जिनके कुशल मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने अल्प अवधि में उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ तैयार कर दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की।

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