मुंबई। प्राइम वीडियो की चर्चित सीरीज़ पंचायत में फुलेरा गांव के नए सचिव जी के रूप में पहचान बनाने वाले विनोद सूर्यवंशी ने हाल ही में अपनी जिंदगी के कुछ बेहद निजी और भावुक अनुभव साझा किए। कर्नाटक के एक छोटे से गांव से निकलकर फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं रहा। इस सफर में उन्हें न सिर्फ आर्थिक तंगी बल्कि गहरे सामाजिक भेदभाव का भी सामना करना पड़ा।
विनोद ने बताया कि उनके गांव में आज भी जाति के आधार पर बंटवारा साफ नजर आता है। गांव के दो अलग-अलग हिस्से हैं एक में उच्च जाति के लोग रहते हैं और दूसरे में दलित समुदाय। उन्होंने कहा कि यह विभाजन सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी महसूस होता है।
बचपन की कड़वी यादें,होटल में खाना खाने के बाद प्लेटें खुद धोए हैं
अपने बचपन का एक दर्दनाक किस्सा बताते हुए विनोद ने कहा कि जब वह 11-12 साल के थे, तब अपने पिता के साथ गांव गए थे। वहां एक होटल में खाना खाने के बाद उन्हें अपनी प्लेटें खुद धोनी पड़ीं, जबकि उन्होंने पूरा बिल चुकाया था। उन्होंने यह भी बताया कि आज भी उनके गांव में एक मंदिर ऐसा है, जहां उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं है।
त्योहार भी बन जाते थे दुख का कारण
विनोद ने अपने संघर्ष भरे दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि त्योहार भी खुशी नहीं, बल्कि दुख लेकर आते थे। उन्होंने कहा, मैंने अपने माता-पिता को कई बार रोते देखा है। त्योहारों के समय लगता था कि ये क्यों आते हैं, क्योंकि हम उन्हें मना ही नहीं पाते थे।
इंडस्ट्री में भी झेलना पड़ा भेदभाव
सिर्फ गांव ही नहीं, बल्कि मनोरंजन इंडस्ट्री में भी उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा। विनोद ने बताया कि उनके डार्क कॉम्प्लेक्शन की वजह से उन्हें कई बार रिजेक्ट किया गया। यहां तक कि एक बार उन्हें चुन लिए जाने के बाद भी हटा दिया गया, क्योंकि क्रिएटिव टीम को उनका रंग पसंद नहीं आया।





