कोरोना ने पूरी दुनिया की प्राथमिकताओं को बदल दिया है। हर देश बाकी सारे काम धंधे, व्यापार, राजनीति और कूटनीति सब छोड़ कर कोरोना से निपटने में लगे हैं, तब नेपाल के बीमार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अचानक भारत के खिलाफ इतने मुखर हो गये हैं कि 200 साल पुराने विवाद को हवा देते हुए नेपाल का नया राजनीतिक प्रशासनिक मैप जारी किया है जिसमें भारत के कब्जेवाले लिपुलेख, मानसरोवर लिंग रोड, कालापानी, लिंपियाधुरा जैसे इलाके को नेपाल की प्रभुसत्ता के दायरे में ला दिया है।
यह सही है कि उत्तराखंड में पड़ने वाले इन इलाकों पर अधिकारिता को लेकर दोनों देशों के बीच 200 वर्ष पुराना विवाद है। हालांकि 350 किलोमीटर का यह एरिया भारत के कब्जे में है और मान सरोवर तीर्थ यात्रियों को सुविधाजनक रास्ता देने के लिए चीन के साथ सहमति के बाद भारत ने यहां मानसरोवर लिंक रोड बनाया है, जो लिपुलेख दर्रे को जोड़ती है। इससे नेपाल के कम्यूनिष्ट प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत के लिए खिलाफ लगातार जहर उगल रहे हैं।
दरअसल नेपाल में जबसे कम्युनिस्ट पार्टियों को सत्ता मिली है तभी से नेपाल धीरे-धीरे चीन की तरफ झुकता रहा है। पहले पुष्प कमल दहल प्रचंड ने नेपाल की विदेश नीति में बुनियादी परिवर्तन करते हुए चीन की तरफ झुकाव बढ़ाया और अब ओली तो पूरी तरह चीन के इशारे पर ही चलते हैं। आज कल नेपाल की राजनीति में चीन का हस्तक्षेप बढ़ा है और कहा तो यहां तक जाता है कि दो साल पहले अल्पमत में होने के कारण जब ओली सरकार गिरने की कगार पर थी तब चीन ने ही सांसदों की खरीद-फरोख्त कर ओली की कुर्सी बचायी थी।
ओली की सत्ता बचाने के लिए काठमांडू में चीन के राजदूत ने दिन-रात एक कर जमकर सांसदों की खरीद फरोख्त की थी। इतना ही नहीं, ओली सरकार ने ही चीन के साथ ट्रॉस हिमालयन रेलवे प्रोजेक्ट समझौता किया है जिसमें चीन से नेपाल को 60 अरब से अधिक का कर्ज मिलेगा। चीन की कर्ज कूटनीति इतनी अधिक आक्रामक है कि नेपाल ही नहीं बल्कि पाकिस्तान, मालदीव, श्रीलंका जैसे देश भी पूरी तरह चीन के शिकंजे में फंस चुके हैं। अब चीन के पैसे से ओली खेल रहे हैं और उसी इशारे पर लंबे समय से भारत के खिलाफ हरकतें कर रहे हैं। इस बार तो सारी मर्यादा और सीमाएं लांघते हुए भारत के भूभाग को नेपाल के मैप में शािमल कर दिया है और विवाद को निपटाने के लिए चीन की मध्यस्थता भी बीच में ले आये हैं।
इतना ही नहीं पूरी दुनिया कोरोना के लिए चीन को कोस रही है लेकिन ओली कोरोना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हैं। ओली की इन हरकतों से स्पष्ट है कि वे चीन की गोद में बैठकर उसी के इशारे पर भारत के खिलाफ काम कर रहे हैं। नेपाल के साथ भारत का रोटी-बेटी, धर्म,संस्कृति एवं इतिहास का गहरा रिश्ता है और यह आगे भी मजबूत ही रहेगा लेकिन अब समय आ गया है जब भारत ओली की हरकतों का संज्ञान लेकर नेपाल में ही उनको ठीक करने का प्रबंध करे।





