लखनऊ। इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। यह साल की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है, जिस पर व्रत रखने से व्यक्ति को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं। कहते हैं कि, निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है। यह व्रत द्वादशी तिथि पर पारण के साथ खोला जाता है। व्रत के दौरान कुछ भी खाना-पीना वर्जित होता है। आमतौर पर श्रद्धालुओं को इस एकादशी का पूरे वर्ष इंतजार रहता है, क्योंकि इस दिन दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती हैं। इस साल निर्जला एकादशी पर कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं। इस वर्ष निर्जला एकादशी पर गुरुवार का शुभ संयोग बन रहा है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस दिन पड़ने वाली एकादशी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। निर्जला एकादशी 2026 इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है। इस दिन रवि योग, शिव योग, सिद्ध योग और गुरुवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इन चारों शुभ योगों का एक साथ पड़ना पूजा-पाठ, मंत्र जाप, भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि इन शुभ योगों में किए गए आध्यात्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
भद्रा का रहेगा प्रभाव, लेकिन नहीं होगी बाधा
निर्जला एकादशी के दिन भद्रा का प्रभाव सुबह 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। हालांकि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दौरान भद्रा का निवास पाताल लोक में होगा। इसलिए इसका प्रभाव व्रत, पूजा-पाठ, दान या धार्मिक कार्यों पर नहीं पड़ेगा। श्रद्धालु बिना किसी चिंता के भगवान विष्णु की उपासना और अन्य धार्मिक कार्य संपन्न कर सकेंगे।
भक्त करेंगे श्रीहरि की पूजा
निर्जला एकादशी साल की सबसे कठिन एकादशी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले लोग न कुछ खाते हैं और न ही पानी पीते हैं। इसलिए इसे बाकी सभी एकादशियों से अलग और ज्यादा कठिन माना जाता है। फिर भी लोग इस व्रत को बड़ी श्रद्धा से रखते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इसका फल बहुत बड़ा होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति पूरे साल की एकादशी नहीं रख पाता, तो वह सिर्फ निर्जला एकादशी रखकर भी उतना ही पुण्य पा सकता है। यही वजह है कि इस व्रत का इंतजार लोग पूरे साल करते हैं। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून 2026 को शाम 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और 25 जून को रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। व्रत हमेशा उदय तिथि के हिसाब से रखा जाता है, इसलिए इस बार निर्जला एकादशी 25 जून, गुरुवार को रखी जाएगी।
क्यों इतना कठिन होता है यह व्रत-
इस व्रत में पानी तक नहीं पीना होता। सुबह से अगले दिन तक पूरा दिन बिना जल के रहना आसान नहीं होता, खासकर जून की गर्मी में। इसी वजह से इसे सबसे कठिन व्रत कहा जाता है। कहानी भी मिलती है कि भीमसेन को भूख बहुत लगती थी और वे व्रत नहीं रख पाते थे, लेकिन उन्होंने भी यह व्रत रखा था। इसलिए इसे भीम एकादशी भी कहते हैं।
निर्जला एकादशी पूजा विधि
निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर शुद्ध होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। घर के पूजा स्थान को साफ करके दीपक जलाएं और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद पीले फूल और पीले वस्त्र अर्पित करें, जो इस व्रत में विशेष शुभ माने जाते हैं। भगवान को सात्विक भोग अर्पित करें और उसमें तुलसी दल जरूर रखें, क्योंकि तुलसी के बिना भोग अधूरा माना जाता है। इसके साथ माता लक्ष्मी की भी श्रद्धापूर्वक आरती करनी चाहिए और पूरे दिन भक्ति भाव से भगवान विष्णु के मंत्रों का जप और स्मरण करना चाहिए। अगले दिन द्वादशी को सूर्योदय के बाद पुन: पूजा करें। फिर गरीबों या ब्राह्मणों को दान या भोजन कराकर स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हुए व्रत का पारण करें।
पूजा का समय
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करें। सुबह 5:25 से 7:10 बजे तक पूजा करना अच्छा माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त 4:05 से 4:45 बजे तक रहेगा। इस समय में पूजा करने से ज्यादा शुभ फल मिलता है। दिनभर भगवान विष्णु का नाम लें और शांत रहने की कोशिश करें।
व्रत का महत्व है
ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी रखने से पाप खत्म होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। इस व्रत का फल बाकी सभी एकादशियों के बराबर बताया गया है। लोग इसे इसलिए भी रखते हैं ताकि जीवन में सुख-शांति बनी रहे। व्रत के बाद उसे सही समय पर खोलना जरूरी होता है। 26 जून को सुबह 5:25 से 8:13 बजे के बीच व्रत खोल सकते हैं। इसी समय को सही माना गया है।
ध्यान रखने वाली बातें
अगर आपकी तबीयत ठीक नहीं है, तो जबरदस्ती व्रत न रखें। दिनभर धैर्य रखें और ज्यादा मेहनत वाले काम से बचें। जरूरतमंद को दान करना अच्छा माना जाता है।





