अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में नाटक का मंचन
लखनऊ। नगर के प्रतिष्ठित सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति, लखनऊ द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली के 47वें मीटिंग के अन्तर्गत स्वीकृत वित्तीय सहयोग से आयोजित प्रथम दिवस में आयोजक संस्था श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति लखनऊ द्वारा सुप्रसिद्ध नाट्य रचना का मानव कौल की नाट्य रचना त्रासदी का नाट्य मंचन स्थानीय अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में नाट्य निर्देशिका अचला बोस, उ०प्र० संगीत नाटक अकादमी अवार्डी के कुशल निर्देशन में मंचित किया गया है। मंचन से पूर्व सतभानन एवं दीप प्रज्जवलन सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ, भूतपूर्व निर्देशक 1/2 अकादमी, गोमती नगर लखनऊ एवं केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी अवार्डी द्वारा दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्धघाटन किया, उन्होंने समस्त कलाकारों को आशीर्वाद प्रदान किया नाटक के कथानक के अनुसार त्रासदी एक ऐसे बेटे की कहानी है जिसने अपनी माँ को खो दिया है। माँ की मृत्यु के बाद वह अकेला पड़ जाता है और अपनी पुरानी यादों में खोने लगता है। उसे बार-बार अपनी माँ की बातें, उनका प्यार, उनकी आदतें और उनके साथ बिताए हुए पल याद आते हैं। बेटा सोचता है कि जब माँ उसके साथ थीं, तब वह उनके महत्व को पूरी तरह नहीं समझ पाया था। अब उनके चले जाने के बाद उसे एहसास होता है कि माँ उसके जीवन का सबसे बड़ा सहारा थीं। उसे इस बात का दुख और पश्चाताप होता है कि वह उनसे और अधिक प्रेम नहीं जता पाया, उनके साथ और समय नहीं बिता पाया। नाटक में बेटा अपनी माँ की यादों के माध्यम से जीवन, मृत्यु, प्रेम और अकेलेपन के बारे में सोचता है। वह समझने की कोशिश करता है कि किसी प्रिय व्यक्ति के चले जाने के बाद भी उसका प्रेम और उसकी स्मृतियाँ हमारे भीतर जीवित रहती हैं। अंत में नाटक यह संदेश देता है कि जिन लोगों से हम प्रेम करते हैं, उनका महत्व हमें अक्सर उनके जाने के बाद समझ में आता है। इसलिए हमें अपने प्रियजनों के साथ रहते हुए ही उन्हें प्रेम और सम्मान देना चाहिए। माँ का प्रेम अनमोल होता है मृत्यु के बाद भी यादें जीवित रहती हैं। पश्चाताप से बेहतर है कि हम अपने प्रियजनों को समय रहते अपना प्रेम व्यक्त करें। जीवन में रिश्तों का महत्व सबसे अधिक है। यह नाटक बाहरी घटनाओं से अधिक एक व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं, स्मृतियों और शोक की यात्रा को प्रस्तुत करता है। ओपन की भूमिका में तुषार बाजपेयी शुभम ने अपने शसक्त अभिनय द्वारा बड़े ही मार्मिक ढंग से रंगमंच पर प्रस्तुत किया जिससे रंग दर्शकगण भावविभोर हो गये।





