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बड़ा मंगल पर एक लाख पौधों का किया गया वितरण

लखनऊ में 15,000 से अधिक भंडारों का किया गया आयोजन
बड़ा मंगल भंडारे: सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण की पहल

लखनऊ। मंगलमान संस्था की ओर से बुधवार को विश्व संवाद केन्द्र में प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। प्रेसवार्ता को वाटर वुमन शिप्रा पाठक और प्रशान्त भाटिया ने संबोधित किया। प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए प्रशान्त भाटिया ने बताया कि ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर ज्येष्ठ मंगल भंडारा इस वर्ष केवल श्रद्धा, सेवा और महाप्रसाद वितरण का पर्व बनकर नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, सुशासन और आधुनिक प्रबंधन का एक अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा है। लखनऊ में ज्येष्ठ मास के सभी आठ बड़े मंगलों और मंगल महोत्सव 2026 की पूर्णता ने यह सिद्ध कर दिया कि सनातन परम्पराएँ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को संगठित, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम भी हैं। इस बार इन आयोजनों को स्वच्छ और हरित भंडारा (ग्रीन भंडारा) के रूप में आयोजित किया गया, जिसने देश-दुनिया के सामने उत्सव सुशासन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया। प्रशान्त ने यह भी बताया कि इस वर्ष ज्येष्ठ माह के आठों मंगलों में पूरे लखनऊ में 15,000 से अधिक भंडारों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक ऊर्जा और सेवा भावना का विराट संगम था। पूरे आयोजन का आर्थिक प्रभाव 150 करोड़ रुपये से अधिक आँका गया है। विशेष बात यह रही कि बिना किसी सरकारी बजटीय सहायता के समाज ने अपने संसाधनों और आपसी सहयोग से इस विशाल व्यवस्था को सफल बनाया। इससे स्थानीय हलवाइयों, टेंट व्यवसायियों, परिवहन सेवाओं, फूल विक्रेताओं तथा दिहाड़ी मजदूरों को व्यापक रोजगार मिला और लगभग डेढ़ लाख मानव श्रम दिवसों का सृजन हुआ। वाटर वुमन शिप्रा पाठक ने प्रेसवार्ता में बताया कि इस बार बड़े मंगल के आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका पर्यावरणीय दृष्टिकोण रहा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए 8 लाख हरित दोने, 4 लाख हरित पत्तल, 1 लाख लकड़ी के चम्मच तथा 1 लाख पौधों का वितरण किया गया। मंगलमान शोध संस्थान के अनुसार 550 से अधिक भंडारे पूर्णत: प्लास्टिक और थमार्कोल मुक्त रहे। प्रयागराज महाकुंभ की तर्ज पर कई स्थानों पर बर्तन बैंक की स्थापना की गई, जहाँ स्टील की थालियों और बर्तनों का उपयोग किया गया। साथ ही बेसहारा पशुओं के लिये ह्यपशु भंडारे का आयोजन भी किया गया, जो इस अभियान की संवेदनशीलता और व्यापकता को दशार्ता है। प्रशान्त भाटिया ने बताया कि बड़े मंगल के आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंच परिवर्तन के पाँच संकल्पों का जीवंत रूप भी बनकर सामने आया। स्व-अनुशासन और नागरिक कर्तव्य के रूप में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और कार्यक्रम के समापन पर स्वच्छता अभियान चलाया। कुटुंब प्रबोधन के अंतर्गत परिवारों की तीन-तीन पीढ़ियाँ सेवा कार्य में एक साथ लगीं। सामाजिक समरसता का अद्भुत दृश्य तब देखने को मिला जब जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति का भेद मिटाकर सभी ने एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। झुग्गी-झोपड़ियों और निर्धन बस्तियों में विशेष भंडारों का आयोजन कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने का प्रयास किया गया। आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दृष्टि से भी यह आयोजन एक प्रेरक उदाहरण रहा। ईरान-अमेरिका तनाव के कारण एलपीजी गैस आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद समाज ने बायोमास आधारित इको-फ्रेंडली चूल्हों का उपयोग कर भंडारों की परम्परा को निर्बाध बनाए रखा। यह स्थानीय संसाधनों के उपयोग और आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश था। इस पूरे अभियान का निरीक्षण करने के लिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी, प्रान्त प्रचारक कौशल जी, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल आर्या जी तथा सह संयोजक राकेश जैन जी ने विभिन्न भंडारों का भ्रमण किया। इसके अतिरिक्त पद्मश्री डॉ. उमाशंकर पाण्डेय, डॉ. जयंती एस. रवि, आचार्य रामचंद्र दास तथा वाटर वुमन शिप्रा पाठक सहित अनेक विशिष्टजनों ने इस अभियान की सराहना की और इसे समाज के लिये अनुकरणीय बताया। इस आयोजन के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का दस्तावेजीकरण करने के लिये लखनऊ विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. उदय प्रताप सिंह के निर्देशन में 45 छात्र-छात्राओं की टीम ने 8 समूहों में व्यापक प्राथमिक सर्वेक्षण किया। यह अध्ययन भविष्य में शोधपत्रों और सामाजिक विश्लेषण के लिये उपयोगी होगा। इस महाअभियान को सफल बनाने में पंचतत्व फाउंडेशन, अखण्ड हिन्द फौज, लोक भारती, प्रकृति भारती, स्टूडेंट फॉर डेवलपमेंट, माँ जानकी सेवा संस्थान, एनएसएस और भारत स्काउट एवं गाइड सहित अनेक संगठनों के 700 से अधिक स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। लखनऊ नगर निगम ने डस्टबिन, स्वच्छता कर्मी और अपशिष्ट निस्तारण की विशेष व्यवस्था कर प्रशासनिक सहयोग दिया, जबकि लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आरडब्ल्यूए के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाया।जिन आयोजनों में नवाचार, स्वच्छता, प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की अनुकरणीय व्यवस्थाएँ की गईं, उन्हें जिलाधिकारी लखनऊ द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

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