लखनऊ। ज्योतिष शास्त्र में नौतपा का विशेष महत्व है। हर साल नौतपा का आरंभ ज्येष्ठ महीने में पड़ता है। नौतपा नौ दिन का समय है, जिस दौरान भीषण गर्मी पड़ती है। नौतपा का संबंध सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन से माना जाता है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, ‘नौ’ और ‘तपा’, जिसका अर्थ है नौ दिनों की भीषण गर्मी। इस साल 2026 में नौतपा की शुरूआत 25 मई के आसपास होने की संभावना है, जो जून के प्रथम सप्ताह तक जारी रहेगी। नौतपा के दौरान ग्रहों के राजा सूर्य 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में विराजमान रहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब उस अवधि के शुरूआती नौ दिनों को ‘नौतपा’ कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, 25 मई 2026 से लेकर 2 जून 2026 तक ग्रहों के राजा सूर्य वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
नौतपा कब होता है?
नौतपा आमतौर पर ज्येष्ठ मास मई या जून के दौरान पड़ता है। ज्योतिष गणना के अनुसार, जब सूर्य चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है, तो पृथ्वी पर गर्मी का प्रभाव चरम पर पहुंच जाता है। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा है, जो शीतलता के प्रतीक हैं, लेकिन जब सूर्य इस नक्षत्र में आता है, तो वह इसकी शीतलता को सोख लेता है। नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें डायरेक्ट पृथ्वी पर पड़ती है। इसी कारण से गर्मी का असर ज्यादा रहता है।
नौतपा के दौरान क्या करें?
नौतपा के दौरान सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय कर सकते हैं। इस अवधि में रो सूर्य को अर्घ्य दें। सूर्य मंत्रों का जाप करें। विधिवत आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। इस समय में लाल कपड़ा, गेंहू, जल, घी, गुड़ का दान करें।
वैज्ञानिक और पौराणिक कारण से समझें
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: इस समय सूर्य उत्तरी गोलार्ध के ठीक ऊपर होता है, जिससे किरणें सीधी पड़ती हैं। इस दौरान वायुमंडल में नमी कम हो जाती है और शुष्क हवाएं (लू) चलने लगती हैं, जिससे तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है।
पौराणिक मान्यता:
माना जाता है कि सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में आना पृथ्वी के ‘यौवन’ की तपस्या की तरह है। यदि इन नौ दिनों में खूब गर्मी पड़े, तो यह भविष्य में अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है।





