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पौराणिक हस्तिनापुर ‘आइकोनिक’ स्थल के रूप में होगा विकसित

लखनऊ। एक लम्बी लड़ाई के बाद आखिरकार कुरु राज्य की राजधानी रहे हस्तिनापुर को उसका हक और गौरव दोनों मिल ही गए। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लोकसभा में बजट पेश करते हुए पुरातात्विक महत्त्व वाले हस्तिनापुर को ‘आइकोनिक’ स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा कर दी। वित्त मंत्री ने पुरातात्विक महत्त्व वाले पांच स्थानों, राखीगढ़ी (हरियाणा), हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश), शिवसागर (असम), धोलावीरा (गुजरात) और आदिचनल्लूर (तमिलनाडु) को ‘आइकोनिक’ स्थलों के रूप में विकसित करने का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि इन जगहों पर राष्ट्रीय म्यूजियम भी बनाये जायेंगे।

हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाभारतकालीन नगरी हस्तिनापुर की बदहाली का संज्ञान ले चुके हैं। विधान परिषद सदस्य और पूर्व मंत्री यशवंत सिंह के पत्र के बाद उन्होंने पर्यटन विभाग और संस्कृति निदेशालय को हस्तिनापुर का गौरव बहाल करने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश पहले से ही दिए गए हैं। भाजपा एमएलसी यशवंत सिंह बिजनौर लोकसभा सीट पर चुनाव के दौरान अप्रैल 2019 में हस्तिनापुर गए थे।

उन्होंने इस ऐतिहासिक नगरी की बदहाली को करीब से देखा था। उन्होंने संस्कृति, इतिहास और पत्रकारिता से जुड़े बुद्धिजीवियों का दल 25 दिसंबर को हस्तिनापुर भेजा। इसी दल की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने 30 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भारत का गौरव रहे हस्तिनापुर की दुर्दशा को लेकर पत्र लिखा था।

मुख्यमंत्री ने उनके खत को संज्ञान में लेते हुए पर्यटन विभाग और संस्कृति निदेशालय को हस्तिनापुर का गौरव बहाल करने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। लोकतन्त्र सेनानी कल्याण समिति के संरक्षक विधान परिषद सदस्य यशवंत सिंह ने हस्तिनापुर के पुरातात्विक विकास को बजट 2020-2021 का हिस्सा बनाए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मन्त्री निर्मला सीतारमण के प्रति हृदय से आभार प्रकट किया और कहा है कि भारत सरकार का यह ऐतिहासिक निर्णय केवल हस्तिनापुर का नहीं, प्राचीन भारत का गौरव बहाल करने वाला निर्णय साबित होगा।

केंद्रीय पुरातात्विक स्थल बन जाने से धर्मराज युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल और सहदेव की स्मृति को ताजा करने वाला पांडेश्वर मंदिर फिर से वह सम्मान पाएगा जो उसे मिलना चाहिए था। दानवीर कर्ण का मंदिर हो, भीष्म पितामह की जन्मकथा को जी रही बूढ़ी गंगा या अमृत कुआं सबके दिन अब बहुरेंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। आजादी के बाद हस्तिनापुर की बदहाली का तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने संज्ञान में लिया।

जवाहर लाल नेहरू ने खुद 6 फरवरी 1949 को हस्तिनापुर के पुनर्निंर्माण कार्य का शिलान्यास किया था। इसके साक्षी के रूप में वह शिलालेख अभी भी पार्क में मौजूद है। इस शिलालेख की उम्र अब सत्तर साल की हो गई है। इस बीच देश व प्रदेश में कई सरकारें आईं और गईं लेकिन हस्तिनापुर की पीड़ा की तरफ किसी ने नजर डालने की जरूरत नही समझी पर अब उसके दिन बहुरेंगे।

लोकतन्त्र सेनानियों को भारत सरकार के इस फैसले की जानकारी तब हुई जब वित्तमन्त्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश आम बजट भाषण में हस्तिनापुर का उल्लेख किया। इसे सुनते ही लोकतन्त्र सेनानियों ने एक दूसरे का मुह मीठा कराया और जय हस्तिनापुर-जय मोदी, जय हस्तिनापुर-जय योगी आदित्यनाथ का नारा लगा कर अपनी खुशी का इजहार किया।
भारत सरकार के इस निर्णय को लेकर प्रसन्न लोकतन्त्र सेनानियों को सम्बोधित करते हुए सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरे आवेदन पर हस्तिनापुर का प्राचीन गौरव बहाल करने के लिए वहां का विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने का निर्देश दे रखा है।

भारत सरकार के इस निर्णय से मुख्यमंत्री की हस्तिनापुर गौरव बहाली की इस विस्तृत रिपोर्ट की तैयारी और क्रियान्वयन को बल मिलेगा। उन्होंने कहा है कि लोकतन्त्र सेनानी कल्याण समिति के जय हस्तिनापुर अभियान के लिए यह बहुत बड़ी सफलता है। केंद्र सरकार के फैसले से अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ साथ महाभारत कालीन हस्तिनापुर का भी विकास हो सकेगा।

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